छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया तेज हो गई है। गुरुवार को भाजपा की उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की प्रत्याशी फूलोदेवी नेताम विधानसभा पहुंचकर नामांकन दाखिल करेंगी। इस दौरान दोनों दलों के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा चुनाव को लेकर गुरुवार का दिन अहम रहने वाला है। भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की प्रत्याशी फूलोदेवी नेताम आज विधानसभा में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगी। दोनों प्रत्याशी विधानसभा परिसर में रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष नामांकन फार्म जमा करेंगी। भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा के नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्य सरकार के कई मंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव सिंह और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। पार्टी की ओर से इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। बघेल नहीं पहुंचेगे नामाकंन में वहीं कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी नेताम के नामांकन के समय नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, कांग्रेस विधायक दल के सदस्य और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। कांग्रेस भी अपने प्रत्याशी के नामांकन के दौरान संगठनात्मक एकजुटता दिखाने की तैयारी में है। फूलो देवी नेताम के नामांकन में पूर्व सीएम भूपेश बघेल नहीं पहुंचेगे। पूर्व सीएम ने दिल्ली प्रवास पर जा रहे है, इसलिए उन्हें फॉर्म में हस्ताक्षर करके फूलो देवी नेताम को शुभकामनाएं दी है। दो सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त होने छत्तीसगढ़ से वर्तमान में राज्यसभा में कुल पांच सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें से दो सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाला है। इन दो नामों में फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं, जो कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद हैं। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 29 जून 2028 तक है। वहीं भारतीय जनता पार्टी से देवेन्द्र प्रताप सिंह का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी। विधानसभा में सदस्यों की संख्या और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दलों की नजरें परिणाम पर टिकी हुई हैं।
अभी ये हैं राज्यसभा सांसद छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए वर्तमान में 5 सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें 2 सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जबकि 2 सदस्यों का कार्यकाल 2028 और 2030 तक जारी रहेगा। 9 अप्रैल 2026 तक कार्यकाल वाले सांसदों में फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं। यह दोनों कांग्रेस पार्टी से हैं। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 29 जून 2028 तक है। वहीं भाजपा से देवेन्द्र प्रताप सिंह का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित है। ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। छत्तीसगढ़ की 2 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 2 हैं। कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1। यानी 90 ÷ (2+1) = 90 ÷ 3 = 30, और उसमें 1 जोड़ने पर आंकड़ा 31 आता है। इसका मतलब साफ है कि किसी भी उम्मीदवार को एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों के प्रथम वरीयता मत चाहिए। राज्यसभा चुनाव में हर विधायक के वोट की वैल्यू समान होती है। इसलिए जो उम्मीदवार 31 का आंकड़ा पार कर लेता है, उसकी जीत सुनिश्चित हो जाती है। ………………….


