जिले के मंडाना कस्बे में धुलण्डी के दिन झंडा उखाड़ने की अनोखी परंपरा निभाई जाती है। रात के समय यहां महिलाएं युवकों पर लाठियां बरसाती है। युवक भी महिलाओं की लाठियों की मार से बचने के लिए इधर उधर भागते हैं। मान्यता है कि झंडा उखाड़ने (ढ़ीचकडा लोकोत्सव) के साथ कस्बे में मनाएं जाने वाले पांच दिवसीय रामनवमी उत्सव का आगाज होता है। दरअसल परम्परा के अनुसार धुलण्डी के दिन सभी महिला- पुरूष होली खेलते है। दिनभर थक जाने के बाद रात में एक मनोरंजन के लिए एक परम्परा निभाई जाती हैं। परम्परा के तहत कस्बे में इमली के पेड़ की टहनी को 3-4 फीट जमीन में रोपा जाता है। गांव व आसपास के क्षेत्र के काफी तादाद में महिलाएं व पुरुष एकत्रित होते है। युवाओं की टोलियां नाचते गाते हुए इस झंडे को उखाड़ने का प्रयास करती है। कस्बे की महिलाएं इस झंडे की सुरक्षा करती है व हाथों में लकड़ी की टहनियां लेकर युवाओं को झंडा उखाड़ने से रोकती है। यह क्रम लगभग 1 घंटे तक चलता रहता है। लेकिन जोश से भरे युवाओं की टोलियां महिलाओं की मार खाते हुए भी झंडे को उखाड़ने का प्रयास करते है। अंत मे संघर्ष करते हुए झंडा उखाड़ने में सफल हो जाते है। झंड़ा उखाड़ने के बाद लोकगीतो की धुनों पर युवाओं द्वारा डांस किया जाता है। टोड़ी मोहल्ला निवासी मोहनलाल सुमन ने बताया कि यह परंपरा काफी सालों पुरानी चली आ रही है। होली दहन में होलिका का दहन हो जाता है। भक्त प्रहलाद जीवित रह जाते है। इसी खुशी में यह उत्सव मनाकर रामनवमी ढ़ीचकडा लोकोउत्सव की तैयारियां शुरू की जाती है। रात में तो जोश और मस्ती में लकड़ी की मार नजर नही आती। लेकिन सुबह पुरुषों के शरीर मे अकड़न होती है। पुरूषो की पीठ व शरीर के कई हिस्सो में लाल लकीरे नजर आती है।


