कोटा के मंडाना कस्बे में 4 मार्च (धुलण्डी) की रात झंडा उखाड़ने की अनोखी परंपरा निभाई गई। रात के समय महिलाएं युवकों पर लाठियां बरसाती नजर आईं। युवक भी महिलाओं की लाठियों की मार से बचने के लिए इधर-उधर भागते रहे। करीब 1 घंटे तक ये दौर चला। मान्यता है कि झंडा उखाड़ने (ढ़ीचकडा लोकोत्सव) के साथ कस्बे में मनाएं जाने वाले पांच दिवसीय रामनवमी उत्सव का आगाज होता है। दरअसल, परम्परा के अनुसार धुलण्डी के दिन सभी महिला- पुरूष होली खेलते हैं। दिनभर थक जाने के बाद रात में मनोरंजन के लिए हर साल की तरह ये रस्म की गई। इसमें कस्बे में इमली के पेड़ की टहनी को 3-4 फीट जमीन में रोपा गया। गांव व आसपास के क्षेत्र के काफी तादाद में महिलाएं व पुरुष एकत्रित हुए। युवाओं की टोलियों ने नाचते गाते हुए इस झंडे को उखाड़ने का प्रयास किया। युवकों को झंडा उखाड़ने से रोकती रही महिलाएं कस्बे की महिलाएं इस झंडे की सुरक्षा में लगी रही। हाथों में लकड़ी की टहनियां लेकर युवाओं को झंडा उखाड़ने से रोकती रहीं। यह क्रम लगभग 1 घंटे तक चलता रहता है। लेकिन जोश से भरे युवाओं की टोलियां महिलाओं की मार खाते हुए भी झंडे को उखाड़ने का प्रयास करते रहे। अंत मे संघर्ष करते हुए झंडा उखाड़ने में सफल हो गए। झंड़ा उखाड़ने के बाद लोकगीतो की धुनों पर युवाओं द्वारा डांस किया। टोड़ी मोहल्ला निवासी मोहनलाल सुमन ने बताया- यह परंपरा काफी सालों पुरानी चली आ रही है। होली दहन में होलिका का दहन हो जाता है, भक्त प्रहलाद जीवित रह जाते हैं। इसी खुशी में यह उत्सव मनाकर रामनवमी ढ़ीचकडा लोकोउत्सव की तैयारियां शुरू की जाती है। रात में तो जोश और मस्ती में लकड़ी की मार नजर नही आती। लेकिन सुबह पुरुषों के शरीर मे अकड़न होती है। पुरूषो की पीठ व शरीर के कई हिस्सो में लाल लकीरे नजर आती है।


