पैकेज्ड फूड से हुई बीमार, हेल्दी प्रोडक्ट्स की रखी नींव:23 साल की ईशा ने बनाई केमिकल फ्री केचप,शार्क टैंक 4 में मिले 1 करोड़

शार्क टैंक इंडिया के चौथे सीजन में हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स बनाने का एक स्टार्टअप आया, जिसका नाम है रिपीट गुड़। इस स्टार्टअप की शुरुआत छत्तीसगढ़ के छोटे से शहर धमतरी जिले की रहने वाली की 23 साल की ईशा झंवर ने की है। यह स्टार्टअप केमिकल फ्री हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स जैसे टोमेटो केचप, मेयोनीज, तंदूरी मेयोनीज, पिज़्ज़ा पास्ता सॉस और इमली-डेट सॉस बेचता है। ईशा का दावा है कि उनके प्रोडक्ट में शुगर, प्रिजर्वेटिव या कोई केमिकल नहीं हैं। ईशा की स्मार्ट पिच से बिजनेस मॉडल से इंप्रेस होकर शार्क्स ने उसमें रुचि दिखाई और उन्हें 1 करोड़ रुपए की फंडिंग (50 लाख तत्काल और 50 लाख की कमिटमेंट) दी। ईशा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने स्टार्टअप जर्नी के एक्सपीरियंस के बारे में बताया। सवाल: आपको स्टार्टअप शुरू करने का आइडिया कैसे आया? जवाब: ईशा ने बताया कि उनका जन्म धमतरी में हुआ और तीसरी कक्षा तक वहीं पढ़ाई की। इसके बाद वे रायपुर चली गईं, फिर 11वीं और 12वीं के लिए कोटा में रहीं। कॉलेज की पढ़ाई के लिए पटियाला गईं, जहां हॉस्टल में रहते हुए पैकेज्ड फूड खाने की आदत लग गई। इसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा, जिससे पहले से मौजूद PCOD, किडनी स्टोन और अन्य समस्याएं और बढ़ गईं। घर लौटने पर, उनकी मां ने पैकेज्ड फूड खाने पर डांट लगाई, जिससे ईशा को महसूस हुआ कि हेल्दी खाने के विकल्प कम हैं, इसलिए उन्होंने खुद सेहतमंद फूड प्रोडक्ट्स बनाने का फैसला किया। यही विचार आगे चलकर उनके स्टार्टअप “रिपीट गुड़” की नींव बना। सवाल: आपका स्टार्टअप कौन-से प्रोडक्ट बनाता है? जवाब: हमारी कंपनी हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स बनाती है, जिसमें टोमेटो केचप, मेयोनीज, तंदूरी मेयोनीज, पिज़्ज़ा पास्ता सॉस और इमली-डेट सॉस जैसे हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स है। सवाल: स्टार्टअप शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती एक सही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ढूंढना था। मैं चाहती थीं कि उनका प्रोडक्ट शुद्ध और साफ-सुथरे माहौल में तैयार हो, लेकिन उन्हें भारत में ऐसी कोई यूनिट नहीं मिली। तब मैंने खुद अपनी यूनिट लगाने का फैसला किया, जो धमतरी से 2 किमी दूर लोहरसी मोड़ पर स्थित है। उनका ऑफिस रायपुर से ऑपरेट होता है। सवाल: स्टार्टअप के लिए आपको फंडिंग कहां से मिली? जवाब: स्टार्टअप के लिए पहली फंडिंग मेरे पापा राकेश झंवर ने दी। इसके बाद कॉलेज से 25,000 रुपए का सहयोग मिला और सरकार ने इनोवेशन के लिए 33 लाख रुपए का ग्रांट दिया। इस आर्थिक सहयोग से मैंने अपने ब्रांड “रिपीट गुड़” को आगे बढ़ाया। सवाल: आपको शार्क टैंक में कैसे सफलता मिली?
जवाब: ईशा झंवर ने बताया कि वो छत्तीसगढ़ की पहली युवती हैं, जिन्होंने शार्क टैंक इंडिया सीजन-4 में जगह बनाई। मैंने अपने प्रोडक्ट्स के साथ न केवल अपने बिजनेस बल्कि धमतरी और छत्तीसगढ़ को भी बेहतरीन तरीके से पेश किया। खास बात यह थी कि मैंने सिर्फ 60 सेकंड में अपने ब्रांड, धमतरी और छत्तीसगढ़ के बारे में समझाया। शार्क टैंक के दौरान मुझे सबसे ज्यादा डर अनुपम मित्तल से था, क्योंकि वे हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स को लेकर काफी सख्त माने जाते हैं। लेकिन जब मैंने अपना प्रोडक्ट समझाया, तो शार्क्स ने मेरे स्टार्टअप में रुचि दिखाई और उन्हें 1 करोड़ रुपए की फंडिंग (50 लाख तत्काल और 50 लाख की कमिटमेंट) मिली। सवाल: ईशा ने अपने ब्रांड का नाम “रिपीट गुड़” क्यों रखा?
जवाब: ईशा ने बताया कि उनका ब्रांड “रिपीट गुड़” हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देता है। उनके सभी उत्पादों में रिफाइंड शुगर की जगह गुड़ का इस्तेमाल किए जाते हैं। मेरा मानना है कि अच्छी चीजों को बार-बार दोहराना चाहिए, इसलिए मैंने ब्रांड नाम भी “रिपीट गुड़” रखा गया है। सवाल: क्या “रिपीट गुड़” के प्रोडक्ट ऑनलाइन उपलब्ध हैं? जवाब: हां, आज उनका प्रोडक्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। उनका दावा है कि भारत में इस तरह के पांच प्रोडक्ट्स में उनका उत्पाद नंबर वन पर है। मेरी कंपनी स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी दे रही है। कई बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिली है। सवाल: ईशा झंवर को सोशल मीडिया पर ट्रोल क्यों किया गया?
जवाब: शार्क टैंक में मेरी पिच के बाद कुछ लोगों ने धमतरी को छोटा कहने पर मुझे ट्रोल किया। इस पर ईशा ने कहा कि धमतरी जनसंख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से एक छोटी जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे अपने शहर को छोटा दिखा रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी जगहों की तुलना में छोटे शहरों में बिजनेस के लिए सही इकोसिस्टम नहीं होता, जिससे चुनौतियां बढ़ जाती हैं। सवाल: समाज में लड़कियों को लेकर जो सोच उस पर आप क्या कहेंगी? जवाब: ईशा ने समाज की उस मानसिकता पर भी सवाल उठाया, जो लड़कियों की पूरी पर्सनालिटी को सिर्फ शादी से जोड़कर देखती है। जब उनके पिता ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगानी शुरू की, तो लोगों ने ताने मारे कि बेटी के लिए फैक्ट्री लगा रहे हो, उसकी शादी कैसे होगी? ईशा का मानना है कि लड़कियां पढ़ाई तो कर रही हैं, लेकिन कितनी लड़कियां आगे बढ़कर खुद का बिजनेस कर रही हैं? समाज को इस सोच को बदलने की जरूरत है। सवाल: आप लड़कियों के लिए क्या संदेश देना चाहती हैं?
जवाब: ईशा झंवर ने युवाओं, खासकर लड़कियों को मैसेज देते हुए कहा, लोग कुछ न कुछ कहेंगे, लेकिन आपको वही करना चाहिए, जो आपके दिल की आवाज हो। सुनो सबकी, करो मन की।

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