टायरों को छलनी कर रही हैं उखड़े ब्रेकर्स की कीलें:प्रमुख मार्गों से गायब हुए प्लास्टिक के ब्रेकर, शहर की प्रमुख सड़कों पर हालात खराब

जिला मुख्यालय की मुख्य सड़कों पर नगर परिषद द्वारा यातायात को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए रेडीमेड स्पीड ब्रेकर अब आमजन की सुरक्षा के बजाय उनके लिए मुसीबत और शारीरिक दर्द का सबब बन गए हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर लगे ये प्लास्टिक और रबर के ब्रेकर रखरखाव के अभाव में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। स्थिति यह है कि कई जगहों पर ब्रेकर गायब हैं और केवल लोहे की नुकीली कीलें सड़क पर खड़ी हैं, जो आए दिन वाहनों के टायर फाड़ रही हैं। लाखों का बजट, उखड़ गए ब्रेकर नगर परिषद ने शहर के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा के नाम पर रोड नंबर एक, रोड नंबर दो, जिला परिषद से मंडावा रोड, चूरू रोड और रानी सती रोड जैसे व्यस्ततम इलाकों में हजारों-लाखों रुपए खर्च कर ये ब्रेकर लगवाए थे। लेकिन घटिया गुणवत्ता या भारी यातायात के कारण ये ब्रेकर कुछ ही समय में उखड़ गए। शहीद कर्नल जेपी जानू स्कूल से लेकर जिला परिषद सर्किल तक बिछाए गए ब्रेकर अब केवल कागजों और बजट की फाइलों में ही दुरुस्त नजर आते हैं, धरातल पर तो सिर्फ गड्ढे और कीलें शेष हैं। इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा शहर के मुख्य चौराहों और लिंक सड़कों पर इन टूटे हुए ब्रेकर्स की स्थिति सबसे भयावह है। प्रभात टॉकीज व बीडीके अस्पताल: यहां ब्रेकर के टूटने से सड़क के बीचों-बीच नुकीली कीलें बाहर आ गई हैं। नगर परिषद परिसर के पास: खुद नगर परिषद के नाक के नीचे लगे ब्रेकर आधे-अधूरे हैं। रोड नंबर दो: अस्पताल के पीछे की तरफ सड़क के दोनों ओर लगे ब्रेकर पूरी तरह टूट चुके हैं। मंडावा मोड़ पुलिस चौकी: सुरक्षा के लिए लगाए गए ब्रेकर अब खुद ही असुरक्षित हो चुके हैं। दोपहिया वाहन चालक और राहगीर सबसे ज्यादा परेशान टूटे हुए ब्रेकर से सबसे ज्यादा खतरा बाइक और स्कूटी चालकों को है। रात के अंधेरे में ये टूटे हुए हिस्से दिखाई नहीं देते, जिससे वाहन स्लिप हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि टूटे ब्रेकर के कारण अचानक ब्रेक लगाने से पीछे से आने वाले वाहनों के टकराने की आशंका बनी रहती है। वहीं, इन पर से गुजरते समय लगने वाले झटकों से लोगों को कमर दर्द और स्लिप डिस्क जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। या तो इन्हें सही करें, या पूरी तरह हटा दें स्थानीय नागरिकों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष है। पवन कुमार, राजेश और सोहेल का कहना है कि या तो नगर परिषद इन ब्रेकर्स की तत्काल मरम्मत करवाए या फिर इन खतरनाक लोहे की कीलों को सड़क से पूरी तरह साफ करे। टूटे ब्रेकर की जगह अब सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है।

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