मनेंद्रगढ़ में एक बेटी ने अपनी मां को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की परंपरागत धारणा को तोड़ दिया। इस कदम को समाज में रूढ़िवादी सोच के खिलाफ एक नई और सकारात्मक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। यह घटना मनेंद्रगढ़ के आमाखेरवा मुक्तिधाम की है। पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष तपन मुखर्जी की पत्नी विजया मुखर्जी का हाल ही में निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम लाया गया। बेटी तन्वी मुखर्जी ने निभाई अंतिम जिम्मेदारी परंपरागत रूप से मुखाग्नि देने की प्रथा पुत्र की ओर से निभाई जाती रही है, लेकिन विजया मुखर्जी की पुत्री तन्वी मुखर्जी ने इस परंपरा को तोड़ते हुए अपनी मां को मुखाग्नि दी। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं। परिवार और समाज के लोग रहे मौजूद अंतिम संस्कार के दौरान मुक्तिधाम में परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और समाज के कई लोग मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। बेटा-बेटी में नहीं कोई फर्क समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि अंतिम संस्कार का अधिकार केवल पुत्र को होता है। हालांकि, तन्वी मुखर्जी के इस कदम ने यह संदेश दिया कि संस्कार और जिम्मेदारियां बेटा-बेटी में कोई भेद नहीं करतीं। लोगों ने की पहल की सराहना मुक्तिधाम में उपस्थित लोगों ने तन्वी की इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और परिवार की हर जिम्मेदारी को समान रूप से निभा रही हैं। प्रेरणादायक बना यह उदाहरण तन्वी मुखर्जी का यह कदम समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। ऐसे उदाहरण पुरानी सोच को बदलने और समाज में समानता का संदेश देने का काम करते हैं।


