मंडी में आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल होने के बाद सराज घाटी के प्रभु श्री मूल खुड्डीजहल महाराज 21 दिनों बाद अपने देवालय लौट आए हैं। देवता ने मंडी से अपने मूल स्थान तक 150 किलोमीटर की पैदल यात्रा चार फीट बर्फबारी और खड़ी चोटियों को पार करते हुए पूरी की। कमेटी के पदाधिकारी गंगाराम ने बताया कि शिवरात्रि महोत्सव से विदा होने के बाद देवता ने सराज बहली, नादोन धार, थ्ररी धार, डीबरा धार और बगड़ागढ़ होते हुए मूल स्थान खुड्डीगाड़ कोठी बहली सराज तक का सफर तय किया। इस दौरान रास्ते में चार फीट तक बर्फ जमी हुई थी और कई ऊंची चोटियों को भी पार करना पड़ा। 21 दिवसीय दौरा भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ कारदार और कमेटी ने जानकारी दी कि देवालय लौटने से पहले देवता ने चार गांवों के देवलुओं का 21 दिवसीय दौरा भी सफलतापूर्वक संपन्न किया। कमेटी ने इस पूरे आयोजन की सफलता के लिए सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया है। पदाधिकारियों ने बताया कि देवता हर साल कई बाधाओं को पार करते हुए महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल होते हैं। इस दौरान वे पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर अपने हजारों भक्तों को दर्शन देते हैं। इस वर्ष भी, जब मेले में पैगोड़ा शैली के नए टेंट लगाए गए थे, तब भी देवता अपने पुराने निर्धारित स्थान पर ही विराजमान रहे।


