नगर निगम ने नगरीय विकास कर की वसूली को तेज करने के लिए सख्त रुख अपना लिया है। चालू वित्त वर्ष के खत्म होने से पहले निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए निजी संवेदक फर्म को रोज वसूली टार्गेट तय कर दिया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि लक्ष्य पूरा नहीं होने की स्थिति में संबंधित फर्म के खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा। नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में यूडी टैक्स वसूली का कुल लक्ष्य 18 करोड़ रुपए तय किया गया है। अब तक संवेदक फर्म के जरीए करीब 13 करोड़ रुपए की ही वसूली हो पाई है, जबकि वित्त वर्ष खत्म होने में सिर्फ एक महीना बचा हुआ है। ऐसे में करीब 5 करोड़ रुपए से ज्यादा की वसूली अभी बाकी है। इस लक्ष्य को समय सीमा 31 मार्च तक पूरा करने के लिए फर्म को टारगेट दिया गया है और इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया है। लंबे समय से नगरीय विकास कर जमा नहीं कराने वाले बड़े बकायादारों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे प्रतिष्ठान जिन पर लाखों रुपए का बकाया है, उन्हें नोटिस जारी कर शीघ्र टैक्स जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में बकाया जमा नहीं कराया गया तो उनके प्रतिष्ठानों को सीज करने सहित सख्त कदम उठाए जाएंगे। सीज कार्रवाई के बाद उसी दिन जमा हुआ टैक्स
हाल ही में नगर निगम द्वारा आधा दर्जन से ज्यादा प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इन प्रतिष्ठानों को सीज करने की कार्रवाई के बाद संबंधित मालिकों ने उसी दिन बकाया टैक्स जमा करा दिया। एक वेयरहाउस से 25 लाख रुपए, आकाश मॉल से 12 लाख रुपए और पांच अन्य दुकानों से भी लाखों रुपए का बकाया कर वसूल किया गया। निगम अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से पुराने बकाया नगरीय विकास कर पर ब्याज और पेनल्टी में छूट की सुविधा 31 मार्च तक लागू है।


