‘हमें ये मालूम नहीं ईरान की अगली मिसाइल कहां गिरेगी’:धमाकों की आवाज आती तो रूह कांप जाती थी, वॉर के बीच दुबई से भारत आए दंपती की आपबीती

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच दुबई से भारत लौटे एयरलाइंस इंजीनियर दंपती ने अपनी आपबीती सुनाई है- 2 दिन डर के साए में 2 बच्चों की चिंता सता रही थी। हमें ये मालूम नहीं था कि ईरान की अगली मिसाइल कहां गिरेगी। सोशल मीडिया पर लगातार डर का माहौल बनाया गया था। लेकिन वहां UAE की सरकार ने बहुत मदद की। हमारी एप पर लगातार अलर्ट के सायरन आ बज रहे थे। देर रात सन्नाटे में जब मिसाइल के टकराने की आवाज आती तो रूह कांप जाती थी। डिफेंस सायरन भी लगातार बजते तो हमें निर्देश थे कि खिड़कियों से दूर हो जाएं। पढ़िए 10 साल से दुबई की एमिरेट्स एयरलाइन में इंजीनियर के पद पर कार्यरत आशीष व्यास (38) और अरब एयरलाइंस में इंजीनियर उनकी पत्नी इप्सिता व्यास (37) की दुबई से राजस्थान के जैसलमेर लौटने की कहानी… फ्लाइट से 1 दिन पहले नो फ्लाइंग जोन की घोषणा आशीष व्यास बताते हैं- वे 10 सालों से दुबई में रह रहे हैं। वे एमिरेट्स एयरलाइंस में इंजीनियर की पोस्ट पर हैं। उनकी पत्नी इप्सिता भी अरब एयरलाइंस में इंजीनियर हैं। उनके 2 बच्चे शिवान्या व्यास (5) और लक्ष्यराज (1) भी उन्हीं के साथ दुबई में रहते हैं। दुबई हमारे दूसरे घर जैसा हैं। व्यास कहते हैं- हमने 15 दिन पहले 13 फरवरी को ही जैसलमेर आने के लिए छुट्टी ले ली थी। 1 मार्च को हमारी दुबई से सीधे जैसलमेर के फ्लाइट थी। इसी दौरान 28 फरवरी को ईरान-इजराइल के बीच जंग छिड़ गई। अचानक फ्लाइटें बंद होने लगीं और UAE को नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया गया। एयरबेस को निशाना बना रही थी मिसाइल आशीष बताते हैं- ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन ने दुबई और अबू धाबी के एयरस्पेस को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। रात के सन्नाटे में जब डिफेंस सायरन बजते थे, तो रूह कांप जाती थी। हमें मोबाइल पर लगातार अलर्ट मिल रहे थे कि घरों के अंदर रहें और खिड़कियों से दूर रहें। आसमान में इंटरसेप्टर मिसाइलों के टकराने से होने वाले धमाके साफ सुनाई दे रहे थे। जैसे ही वॉर तेज होने लगी UAE के प्रमुख हवाई अड्डों को बंद कर दिया गया। एयरस्पेस को ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित कर दिया गया। हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए। पता नहीं अगली मिसाइल कहां गिरेगी आशीष कहते हैं- स्थिति गंभीर थी, लेकिन दुबई प्रशासन ने आंतरिक सुरक्षा और रसद (Logistics) की व्यवस्था बहुत मजबूत रखी थी। पैनिक जरूर था, लेकिन लूटपाट जैसी स्थिति नहीं थी। मानसिक तनाव चरम पर था क्योंकि किसी को नहीं पता था कि अगली मिसाइल कहां गिरेगी। हमने टुकड़ों में फ्लाइट लेने का फैसला किया इप्सिता व्यास ने बताया- एविएशन फील्ड में होने के कारण हमें पता था कि हालात कितने गंभीर हैं। रनवे पर खड़े विमानों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा था। हमारी फ्लाइट रद्द हो गई और हम ऐसे भंवर में फंस गए जहां से निकलना आसान नहीं था। घर पर बच्चे डरे हुए थे और जैसलमेर में पिताजी हर पल फोन कर रो रहे थे। हमसे पल-पल की जानकारी ले रहे थे। इप्सिता कहती हैं- भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण कुछ घंटों के लिए फ्लाइट्स के लिए सेफ कॉरिडोर को खोला गया। उसी दौरान आशीष ने बिना एक पल गंवाए टुकड़ों में यात्रा करने का फैसला किया। जैसे ही एयरस्पेस खुला, आशीष ने बेंगलुरु की टिकट बुक की। दुबई एयरपोर्ट पर भारी भीड़ और अफरातफरी के बीच वे किसी तरह विमान में सवार हुए। बेंगलुरु पहुंचने के बाद उन्होंने मुंबई के लिए दूसरी कनेक्टिंग फ्लाइट ली। सबसे लास्ट में मुंबई से तीसरी फ्लाइट पकड़कर वे जैसलमेर उतरे। जैसलमेर एयरपोर्ट पर जैसे ही व्यास परिवार उतरा, वहां मौजूद उनके रिश्तेदारों ने उन्हें गले लगा लिया। अभी भी फंसे हैं हजारों भारतीय आशीष ने बताया कि दुबई और आसपास के खाड़ी देशों में अभी भी लाखों भारतीय कार्यरत हैं। उनमें से कई लोग छुट्टी पर घर आना चाहते हैं या युद्ध के डर से वतन लौटना चाहते हैं, लेकिन एयरस्पेस के बार-बार बंद होने और टिकटों के आसमान छूते दामों के कारण वे फंसे हुए हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं। आशीष ने खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों को सेफ रहने के टिप्स भी दिए- वॉर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान के युवक की ईरान के हमले में मौत:क्रूड ऑयल टैंकर पर गिरी थी मिसाइल, 3 दिन से शव ढूंढ रही एजेंसी अमेरिका-इजराइल और ईरान की वॉर में राजस्थान के एक युवक की मौत हो गई। नागौर जिले का रहने वाला युवक क्रूड ऑयल कंपनी के शिप पर जॉब करता था। (पढ़ें पूरी खबर)

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