अमृतसर में सिख सद्भावना दल के प्रमुख भाई बलदेव सिंह वडाला ने आज अमृतसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने पंजाब सरकार और सिख संस्थाओं से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान और कानूनी अस्तित्व के मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की। भाई वडाला ने स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिखों के लिए केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि ‘जागत जोत’ गुरु हैं। उन्होंने वर्ष 2008 में पंजाब विधानसभा द्वारा पारित श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट का उल्लेख किया। इस कानून का उद्देश्य गुरु साहिब के पावन स्वरूपों की छपाई, सेवा-संभाल और मर्यादा सुनिश्चित करना था, जिसकी जिम्मेदारी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को सौंपी गई थी। बेअदबी की घटनाएं लगातार सामने आ रही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों से गुरु साहिब के स्वरूपों की बेअदबी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने बाबा गुरदित्त्ता कांड, बरगाड़ी बेअदबी मामले और एसजीपीसी के प्रबंधन से गायब हुए 328 पावन स्वरूपों तथा हस्तलिखित बीड़ों का जिक्र किया। वडाला ने कहा कि सिख विरोधी ताकतें माहौल खराब करने के लिए ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रही हैं। पंजाब सरकार से की मांग भाई वडाला ने अमेरिका में खनंद सिंह द्वारा चीन में गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप छपवाने के मामले का भी उल्लेख किया और आरोपियों को माफी दिए जाने पर अफसोस जताया। उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि जागत जोत एक्ट में संशोधन कर इसे और सख्त बनाया जाए। बेअदबी पर कड़ी सजा की मांग उन्होंने सुझाव दिया कि गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने वालों को मानसिक रोगी बताकर छोड़ने के बजाय उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराएं लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कड़ी से कड़ी सजा, यहां तक कि मौत की सजा का भी प्रावधान करने की मांग की। गुरु ग्रंथ साहिब को बताया मार्गदर्शक भाई वडाला ने चेतावनी दी कि यदि सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की विशिष्ट पहचान को समाप्त कर उन्हें अन्य धार्मिक ग्रंथों के साथ ‘होली बुक’ श्रेणी में शामिल करने का प्रयास करती है, तो सिख पंथ इसका कड़ा विरोध करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर और प्रोफेसर पूरण सिंह जैसे विश्व प्रसिद्ध विद्वानों ने भी गुरु ग्रंथ साहिब को पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक बताया है।


