एकल पट्टा प्रकरण में गठित कमेटी को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले में आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी जीएस संधू ने कमेटी की वैधानिकता को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। इस मामले में गुरुवार को हाई कोर्ट सुनवाई करेगा। राज्य सरकार ने एकल पट्टा प्रकरण में दर्ज एफआईआर व उसे लेकर विभिन्न स्तरों पर लिए गए निर्णयों और अदालत में लंबित मामले में राय देने के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश जस्टिस आरएस राठौड़ की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। एकल पट्टा प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाई कोर्ट में पहले से ही मुख्य न्यायाधीश की बैंच मामले की फाइनल सुनवाई कर रही है। सरकार बदलने पर राज्य का रूख नहीं बदल सकता
याचिका में कहा गया है कि सरकार एक आपराधिक मामले की जांच के लिए कमेटी गठित नहीं कर सकती है। वहीं जिस मामले की जांच पहले ही सक्षम एजेंसी द्वारा की जा चुकी हो, मामला अलग-अलग अदालतों में लंबित हो। उसे लेकर कमेटी बनाना कानूनी रूप से अनुचित है। याचिका में कहा गया कि प्रदेश में राजनीतिक दल की सरकार बदल जाने मात्र से राज्य का रूख नहीं बदल सकता है। याचिका में कमेटी की वैधानिकता को भी चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा सुनवाई के दिए थे निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को हाई कोर्ट के 17 जनवरी 2023 और 15 नवंबर 2022 को दिए दोनों आदेश रद्द कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश खुद इस मामले की सुनवाई करें और 6 महीने के अंदर अपना फैसला दें। इसके बाद 6 दिसंबर को हाईकोर्ट ने एक बार फिर से एकल पट्टा केस में सुनवाई शुरू की थी। बता दें कि 17 जनवरी के आदेश से हाई कोर्ट ने तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर और जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को बंद कर दिया था। 15 नवंबर 2022 को हाई कोर्ट ने धारीवाल को राहत देते हुए एसीबी कोर्ट में चल रही प्रोटेस्ट पिटीशन सहित अन्य आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया था। सरकार ने कहा था- धारीवाल को दी क्लीन चिट गलत
सरकार ने हाई कोर्ट में नई अर्जी दायर करके कहा था कि जिन क्लोजर रिपोर्ट में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और अन्य अधिकारियों को क्लीन चिट दी गई थी। वो अधूरी और दोषपूर्ण जांच पर आधारित थी। सरकार ने रिटायर्ड जज आर.एस. राठौड़ की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने में गंभीर चूक हुई थी। राजस्थान सरकार ने अब इन प्रक्रियात्मक त्रुटियों को सुधारने और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। 14 साल पहले जारी किया था एकल पट्टा
29 जून 2011 को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम एकल पट्टा जारी किया था। इसकी शिकायत परिवादी रामशरण सिंह ने 2013 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में की थी। एसीबी में शिकायत के बाद तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी, शैलेंद्र गर्ग और दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इनके खिलाफ एसीबी कोर्ट में चालान पेश किया था। मामला बढ़ने पर विभाग ने 25 मई 2013 को एकल पट्टा निरस्त कर दिया था। एकल पट्टा प्रकरण में तत्कालीन वसुंधरा सरकार के समय 3 दिसंबर 2014 को एसीबी ने मामला दर्ज किया था। आरोपियों के खिलाफ चालान भी पेश किया था। उस समय तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल से भी पूछताछ की गई थी। प्रदेश में सरकार बदलते ही गहलोत सरकार में एसीबी ने मामले में तीन क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी। तीनों क्लोजर रिपोर्ट में सरकार ने इस मामले में पूर्व आईएएस जीएस संधू, पूर्व आरएएस निष्काम दिवाकर और ओंकारमल सैनी को क्लीन चिट दी थी।


