शिक्षा-मंत्री बोले- मिड-डे-मील और मदरसा यूनिफॉर्म घोटाले की होगी जांच:कहा- स्कूलों में अब री-टोटलिंग के साथ होगी री-चेकिंग, कर्मचारियों-टीचर्स का करेंगे प्रमोशन

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में भी अब री-टोटलिंग के साथ री-चेकिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके साथ ही बोर्ड परीक्षा में नकल और धांधली रोकने के लिए अलग-अलग एक्सपर्ट से पेपर सेट तैयार करवाए जाएंगे। यह घोषणा शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मंगलवार को विधानसभा सत्र के दौरान की है। दिलावर ने कहा कि अब परीक्षाओं में री-टोटलिंग के साथ री-चैकिंग का नवाचार भी किया जा रहा है। अभी पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड परीक्षाओं के पेपर भी अब अलग – अलग विशेषज्ञों से बनवाए जाएंगे। इससे पेपर आउट और नकल माफिया पर अंकुश लगेगा। वे बोले- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा प्रदान करने के लिए बताया गया है। इसके लिए राजस्थान में शब्दकोश तैयार कर लिया गया है। अब हम इसी नीति अनुसार पाठ्य पुस्तकें तैयार कर रहे हैं। उन्होंने ये भी संकेत दिया कि शिक्षा विभाग में जल्द ही कर्मचारियों और ग्रेड थर्ड टीचरों की डीपीसी (प्रमोशन) तैयार की जाएगी। मिड-डे मील के सामन खरीद टेंडर में हुई गड़बड़ियां दिलावर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने कोरोना के दौरान मिड-डे मील में खाना पकाने की लागत के बराबर सामग्री वितरित करने का निर्णय लिया। उस दौरान वित्त विभाग ने अभिभावकों के खातों में भुगतान कराने के लिए कहा था। विभाग ने सामग्री ही वितरित करने का निर्णय लिया। वे बोले- पिछली सरकार में 59 लाख 81 हजार विद्यार्थियों की संख्या होने के बावजूद 66 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को महामारी के समय सामग्री वितरित होना बताया। जबकि कोविड के कारण कोई बाहर तक नहीं निकल रहा था। इसके साथ ही सामग्री खरीद टेंडर में भी गड़बड़ियां हुई हैं। कि सीएजी रिपोर्ट के अनुसार यह 1 हजार 705 करोड़ रूपए का घोटाला बताया है। जिसकी उस समय जांच कराई गई। लेकिन, अब हमारी सरकार उस समय की जांच को निरस्त करते हुए नई टीम द्वारा निष्पक्ष जांच कराएगी। इसमें किसी भी सूरत में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। बोले- राजस्थान में स्कूलों को बंद नहीं किया गया शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राजस्थान में स्कूलों को बंद नहीं किया। बल्कि बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित की है। प्रदेश में 369 स्कूलों में शून्य नामांकन, 81 स्कूलों एक ही परिसर और 100 मीटर की परिधि में संचालित थे। कोएड स्कूलों में बालक और बालिकाएं दोनों अध्ययनरत है, जबकि बालिका स्कूलों में भी बालिकाओं के साथ बालक भी अध्ययनरत थे। उन स्कूलों के एक ही परिसर होने से दोनों स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक, संसाधन उपलब्ध होने के साथ – साथ बालिकाओं को सभी अतिरिक्त विषय और संकाय पढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि सरकार शिक्षा विभाग के दिव्यांग कार्मिकों के प्रति संवेदनशील है। विभाग में 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित और मूकबधिर अधिकांश कार्मिकों को उनके इच्छित स्थानों पर पदस्थापित कर दिया गया है। शेष बचे कार्मिकों को भी शीघ्र लगा दिया जाएगा। एक कैटेगरी के स्कूलों का होगा एक जैसा रंग शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के आईडी कार्ड बनाए जाएंगे। इसके साथ ही एक ही श्रेणी के स्कूलों का एक ही तरीके से रंग-रोगन किया जाएगा। शिक्षा विभाग में सभी संवर्गों की डीसीपी कराई जा रही हैं। आगे अप्रैल महीने से ही विभिन्न संवर्गों की डीपीसी कराकर स्कूलों में सभी पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा। वहीं ग्रेड थर्ड टीचर को प्रमोशन करेंगे। इसके साथ ही पिछली सरकार में की गई पदोन्नतियों में सामने आई अनियमितताओं की जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएंगी। वे बोले चुनाव आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारियों से आग्रह किया कि शिक्षक की बीएलओ ड्यूटी मुख्यालय स्तर पर ही लगाई जाए। ताकि वह स्कूलों में अध्यापन व्यवस्था की सुव्यस्थित कर सकें। हमारी सरकार ने सभी स्कूलों को क्रमोन्नत करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही जिन स्कूलों में अब तक शौचालय नहीं बने है, वहां इसी वित्तीय वर्ष में निर्माण करा दिए जाएंगे।

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