फिल्म जॉली एलएलबी-3 को लेकर हाई कोर्ट ने अभिनेता अक्षय कुमार, अरशद वारसी, फिल्म के डायरेक्टर सुभाष कपूर सहित अन्य के द्वारा दायर रिवीजन याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। आज जस्टिस अशोक जैन की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद मामले में सुनवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह रिवीजन फिल्म के खिलाफ अजमेर कोर्ट में दायर वाद को लेकर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 2 अगस्त 2024 को ही रोक लगा दी थी। अब यह रोक फैसला आने तक जारी रहेगी। अजमेर में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान राठौड़ ने फिल्म के खिलाफ वाद दायर करते हुए कहा था कि फिल्म से जज और वकीलों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व में भी इस फिल्म के दो पार्ट में न्यायपालिका की छवि धूमिल की गई थी। सेंसर बोर्ड से पहले कोर्ट को जांच का अधिकार नहीं
हाई कोर्ट में आज अक्षय कुमार व अन्य की ओर से बहस करते हुए सीनियर एडवोकेट आरके अग्रवाल ने कहा कि फिल्म के दृश्यों की जांच करने का अधिकार सेंसर बोर्ड को है। अगर सेंसर बोर्ड से प्रमाणित फिल्म पर किसी को आपत्ति है तो सिनेमेटोग्राफी एक्ट में रिवीजन और अपील का प्रावधान है। लेकिन केवल आंशका मात्र से किसी फिल्म की शूटिंग रोकना और उसकी जांच कोर्ट द्वारा किया जाना ठीक नहीं है। ऐसे में अजमेर कोर्ट में दायर दावे को खारिज किया जाए। वहीं बार एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि हम न्यायपालिका की गरिमा की बात कर रहे हैं। इस फिल्म के पिछले दो पार्ट में न्यायपालिका की छवि को धूमिल किया गया था। इसलिए हमारी मांग है कि जजेज और अधिवक्ताओं की कमेटी गठित करके इस फिल्म के दृश्यों और अन्य जानकारी उन्हें दी जाए। अजमेर डीआरएम ऑफिस में हुई थी शूटिंग
मामले से जुड़े अधिवक्ता अधिराज मोदी और आदित्य चौधरी ने बताया कि फिल्म की शूटिंग 25 अप्रैल से 10 मई 2024 तक अजमेर डीआरएम ऑफिस में हुई थी। दावे में सरकारी भवन में शूटिंग होने को भी गलत ठहराया गया था। लेकिन फिल्म निर्माताओं की ओर से कहा गया था कि हमने फिल्म शूटिंग के लिए पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए मंजूरी ली है। वहीं इसके बदले रेलवे को करीब 25 लाख रुपए का भुगतान भी किया है।


