जयपुर डिक्लेरेशन’ की घोषणा के साथ तीन दिवसीय 12वें रीजनल 3आर और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम इन एशिया एंड द पैसिफिक का समापन हुआ। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को 12वें रीजनल 3आर और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम इन एशिया एंड द पैसिफिक के समापन पर ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह डिक्लेरेशन सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने भारत की ओर से C-3 (Cities Coalition for Circularity) गठबंधन के प्रस्ताव को भी एक महत्वपूर्ण पहल बताया। फोरम में 35 देशों के 1000 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिसमें 24 एशिया-प्रशांत देशों के सरकारी अधिकारी, विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल रहे। भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने समापन के अवसर पर कहा कि एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए यह क्षेत्रीय 3आर और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम एक ऐतिहासिक अवसर रहा है। उन्होंने बताया – पिछले तीन दिनों में हमने पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के सतत उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से एक बेहतर भविष्य की दिशा में कई महत्वपूर्ण चर्चाएं और विचार-विमर्श किए हैं। आज के समय में रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक आवश्यकता बन चुकी है। हमारे प्रयासों से ही हम प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन बना सकते हैं। इस फोरम के दौरान विशेषज्ञों से मिली जानकारी और विभिन्न प्रदर्शनियों में सर्कुलर इकोनॉमी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को देखने-समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सिटीज 2.0 के तहत शहरों को बेहतर बनाने के लिए प्रभावी और सफल मॉडल विकसित करने में मदद मिलेगी। साहू ने राजस्थान सरकार, जयपुर प्रशासन और सभी आयोजकों को धन्यवाद दिया और कहा कि इस फोरम से प्राप्त ज्ञान और प्रेरणा को सभी को अपने-अपने देश और समुदायों तक ले जाना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। जयपुर डिक्लेरेशन: सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की योजना फोरम के आखिरी दिन सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ को अपनाया। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने और वेस्ट मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए 10 साल की रणनीति तय की गई है। डिक्लेरेशन के प्रमुख बिंदु: C-3 (Cities Coalition for Circularity): सर्कुलर इकोनॉमी को लेकर शहरों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए नया वैश्विक गठबंधन। कचरा प्रबंधन और रिसाइकलिंग: अलग-अलग तरह के वेस्ट मैनेजमेंट के लिए सर्कुलर इकोनॉमी के लक्ष्य तय किए गए। ग्रीन टेक्नोलॉजी और संसाधन दक्षता: सस्टेनेबल मटेरियल्स और ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल पर जोर। सस्टेनेबल फाइनेंसिंग: पर्यावरण से जुड़ी योजनाओं के लिए फंडिंग और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति। समावेशिता: अनौपचारिक क्षेत्र, लैंगिक समानता और श्रम अधिकारों को भी ध्यान में रखा गया। 18 शहरों को सुपर क्लीन सिटी बनाने की योजना फोरम के पहले दिन केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में CITIIS 2.0 की साइनिंग सेरेमनी हुई। इस योजना के तहत 1800 करोड़ रुपए की लागत से 18 शहरों को सुपर क्लीन सिटी बनाने का निर्णय लिया गया। 2050 तक 1 करोड़ नई नौकरियों की संभावना कार्यक्रम के दूसरे दिन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत में 2050 तक सर्कुलर इकोनॉमी से 1 करोड़ नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। भारत ने C-3 गठबंधन में नेतृत्व करने की बात कही मनोहर लाल खट्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बताया- जयपुर डिक्लेरेशन एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों को सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा। भारत इस दिशा में लीडरशिप निभाएगा और C-3 गठबंधन के जरिए सभी देशों को इससे जोड़ने का प्रयास करेगा।’ आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि यह फोरम पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के सतत उपयोग और वेस्ट मैनेजमेंट पर विचार-विमर्श का बड़ा मंच बना। फोरम में बड़ी भागीदारी इस फोरम में 24 एशिया-प्रशांत देशों के सरकारी अधिकारी, विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए। 75 शहरों (9 अंतरराष्ट्रीय और 66 भारतीय शहर) से प्रतिनिधित्व रहा। 120 वक्ताओं ने 29 मुख्य सत्र, 10 थीमेटिक सेशंस, 6 कंट्री ब्रेकआउट सेशंस और 7 साइड इवेंट में भाग लिया। भारत के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 800 से ज्यादा प्रतिनिधि मौजूद रहे।


