भारतीय बौद्ध महासभा ने बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 को लेकर राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा है। महासभा का कहना है कि यह अधिनियम भारतीय संविधान के कई अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है। वर्तमान में महाबोधि मंदिर का प्रबंधन एक 9 सदस्यीय समिति के पास है। इस समिति में 5 हिंदू और 4 बौद्ध सदस्य हैं। समिति का अध्यक्ष हमेशा एक हिंदू व्यक्ति को ही बनाया जाता है। बौद्ध महासभा का आरोप है कि हिंदू बहुल समिति बौद्धों को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है। साथ ही यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस विश्व धरोहर के मूल स्वरूप को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। महासभा ने ज्ञापन में कहा है कि जब हिंदू मंदिरों में ब्राह्मण, मस्जिद में मौलवी, चर्च में पादरी और गुरुद्वारे में ग्रंथी होते हैं, तो महाबोधि महाविहार का पुजारी भिक्षु क्यों नहीं हो सकता। बौद्ध समुदाय ने राष्ट्रपति से मांग की है कि इस असंवैधानिक अधिनियम को निरस्त किया जाए। साथ ही महाबोधि मंदिर का पूरा प्रशासनिक नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थानों के स्वायत्त प्रबंधन में बाधा उत्पन्न करती है।


