जैसलमेर आएंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत:चादर महोत्सव की शुरुआत करेंगे, सिक्का-डाक टिकट विमोचन भी होगा

जैसलमेर की ऐतिहासिक धरा पर कल से आस्था और आध्यात्म का एक अभूतपूर्व संगम होने जा रहा है। 6 से 8 मार्च 2026 तक आयोजित होने वाले त्रिदिवसीय ‘चादर महोत्सव’ और ‘दादागुरु इकतीसा पाठ’ का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत करेंगे। इस भव्य समारोह को लेकर जैसलमेर में तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। सोनार किले से शुरू होगा कार्यक्रम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. मोहन भागवत कल सुबह 10:30 बजे जैसलमेर दुर्ग स्थित दशहरा चौक पहुंचेंगे। वे यहां ऐतिहासिक पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन करेंगे और प्रसिद्ध जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार का अवलोकन करेंगे। इसी भंडार में 11वीं शताब्दी के महान आचार्य श्री जिनदत्त सूरी की वह पावन चादर सुरक्षित है, जो श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है । डॉ. भागवत यहां ‘दादा गुरुदेव’ की पवित्र चादर के दर्शन कर अनुभव पंजी में अपने विचार भी साझा करेंगे। सिक्का, डाक टिकट और पुस्तक का होगा विमोचन दुर्ग दर्शन के पश्चात, सरसंघचालक देदांसर मेला ग्राउंड स्थित मुख्य समारोह स्थल पहुंचेंगे। यहां वे गच्छाधिपति आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सूरी जी की पावन निश्रा में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर डॉ. भागवत दादा गुरुदेव की स्मृति में विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी करेंगे। साथ ही, डॉ. विद्युत प्रभा जी द्वारा लिखित ‘दादा गुरुदेव’ पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा। 871 वर्षों का इंतजार होगा खत्म इस महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष 871 वर्षों बाद होने वाला ‘चादर अभिषेक’ है । परंपरा के अनुसार, इस पवित्र चादर को जैसलमेर किले से एक भव्य वरघोड़े (जुलूस) के रूप में निकाला जाएगा । महोत्सव के दूसरे दिन, यानी 7 मार्च को दोपहर में इस चादर का विधिवत महाअभिषेक संपन्न होगा। विश्व रिकॉर्ड की तैयारी: 1.08 करोड़ श्रद्धालु एक साथ आयोजन समिति के अनुसार, 7 मार्च को एक विश्व कीर्तिमान रचने की तैयारी है। इस दिन दुनिया भर के विभिन्न कोनों से करीब 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु एक ही समय पर सामूहिक ‘दादागुरु इकतीसा पाठ’ करेंगे । इस महासंकल्प में विश्व हिंदू परिषद, विद्या भारती और करीब 30 हजार सत्संग केंद्रों के माध्यम से करोड़ों लोग प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से जुड़ेंगे। विद्वत संगोष्ठी और आचार्य पद की घोषणा महोत्सव के अंतिम दिन, 8 मार्च को “भारत की सांस्कृतिक एकात्मता में दादागुरु परंपरा का योगदान” विषय पर राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी आयोजित की जाएगी । इसी दिन उपाध्याय महेंद्र सागर महाराज को ‘आचार्य पद’ प्रदान करने का महत्वपूर्ण समारोह भी संपन्न होगा। इस तीन दिवसीय आयोजन में करीब 400 संतों और 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम: डॉ. मोहन भागवत का जैसलमेर दौरा (6 मार्च)

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