भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री अकाल तख्त साहिब से बुधवार को होला मोहल्ला सजाया गया। यह होला महल्ला श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान प्रो. इंदरजीत सिंह गगोआनी और महासचिव हरमनजीत सिंह की ओर से एसजीपीसी के सहयोग से मनाया गया। दोपहर 12 बजे श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास के बाद ऐतिहासिक निशान साहिब और पंज प्यारों की अगुवाई में होला मोहल्ला शुरू हुआ। नगर कीर्तन के मार्ग पर श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा की। इसमें शब्दी जत्थे, बैंड, नरसिंघे और गतका पार्टियों ने खालसाई वेशभूषा में शिरकत की। यह नगर कीर्तन श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू होकर विभिन्न बाजारों, गुरुद्वारा बुर्ज अकाली बाबा फूला सिंह, घी मंडी चौक, श्री गुरु सिंह सभा मुख्यालय, हेरिटेज स्ट्रीट और जलियांवाला बाग से होते हुए घंटाघर पहुंचा और वापस अकाल तख्त साहिब पर संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्री हरमंदर साहिब के प्रबंधक सतनाम सिंह, गुरवेल सिंह, जसबीर सिंह सेठी, प्रभजोत सिंह सेठी, हरसिमरन सिंह सेठी, दिलप्रीत सिंह सेठी, पुनीत सिंह सेठी, युद्धवीर सिंह सेठी, इंद्रजीत सिंह आरीवाला, रविंदरजीत सिंह, सुखदेव सिंह सचदेवा, मनजीत सिंह मंजल, गोपाल सिंह, हरभजन सिंह, गुरबख्श सिंह बेदी, गुरदीप सिंह सलूजा, जतिंदर सिंह बहल, गुरिंदर सिंह ढींगरा ने गुरु घर का आशीर्वाद हासिल किया। उक्त नगर कीर्तन रूपी होला महल्ला की खासियत यह है कि इसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश नहीं किया जाता, बल्कि सुरमई पवित्र निशान साहिब की अगुवाई में पंथक परंपरा के अनुसार इसे आयोजित किया जाता है। नगर कीर्तन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेते हुए बोले सो निहाल सत श्री अकाल के जयकारे लगाए। होला महल्ला में निहंग सिंहों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। गौरतलब है कि आनंदपुर साहिब में होला महल्ला बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, वहीं अमृतसर में इस नगर कीर्तन का खास महत्व है। ऐतिहासिक रूप से, यह सुंदर निशान साहिब दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने बाबा राम सिंह जी को भेंट किया था। यह परंपरा महाराजा रणजीत सिंह के समय से लगातार चली आ रही है, जो आज भी पंथक शान और खालसा विरासत की निशानी बनी हुई है। श्री अकाल तख्त साहिब से होला महल्ला निकालती संगत । गतका के जौहर दिखाते बच्चे ।


