राज्य के बाहर काम कर रहे मजदूरों के लिए 5 शहरों में खुलेंगे सहायता केंद्र

झारखंड सरकार राज्य से बाहर काम कर रहे श्रमिकों की सहायता के लिए देश के पांच बड़े शहरों में प्रवासी सहायता केंद्र खोलने जा रही है। ये केंद्र दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई में बनेंगे। इन केंद्रों के माध्यम से आसपास के करीब 17 राज्यों में काम कर रहे झारखंड के मजदूरों को सहायता दी जाएगी। श्रम विभाग द्वारा तैयार झारखंड राज्य प्रवासी सुलभ सहायता योजना को विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकृत समिति ने मंजूरी दे दी है। योजना का उद्देश्य दूसरे राज्यों में फंसे या किसी संकट में पड़े प्रवासी मजदूरों और उनके परिजनों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है। 5 प्रवासी सहायता केंद्र जोनल समन्वयक के रूप में कार्य करेंगे झारखंड राज्य मुख्यालय में स्थापित होने वाले राज्य प्रवासी नियंत्रण केंद्र के अधीन पांच प्रवासी सहायता केंद्र काम करेंगे। ये केंद्र अपने-अपने क्षेत्रों में जोनल समन्वयक के रूप में भी कार्य करेंगे और आसपास के राज्यों में काम कर रहे श्रमिकों को सहायता प्रदान करेंगे। इसलिए शुरू की जा रही है योजना कोविड काल के दौरान राज्य के प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए एक सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाया गया था, जो दूसरे राज्यों और विदेशों में फंसे श्रमिकों को मदद उपलब्ध कराता था। फिलहाल वह बंद हो चुका है। इसके कारण प्रवासी श्रमिकों को अपेक्षित सहायता देने में दिक्कत हो रही है। कई मामलों में मजदूरों को आर्थिक या पारिवारिक कारणों से घर लौटने में परेशानी होती है। वहीं, असामयिक मृत्यु होने पर पार्थिव शरीर को घर तक लाने में भी कठिनाई आती है। इन समस्याओं को देखते हुए सरकार यह नई योजना शुरू कर रही है। पात्रता… इस योजना का लाभ वही मजदूर ले सकेंगे जो झारखंड के स्थायी निवासी हों, रोजगार के लिए वैध तरीके से राज्य से बाहर गए हों और किसी संकट में फंसे हों। योजना का संचालन ऐसे किया जाएगा… योजना के प्रचार-प्रसार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए प्रत्येक जिला और राज्य मुख्यालय को हर वर्ष राशि आवंटित की जाएगी। अन्य राज्यों में संचालित प्रवासी सहायता केंद्रों का संचालन राज्य कौशल विकास मिशन सोसाइटी के माध्यम से किया जाएगा। योजना की निगरानी झारखंड प्रवासी श्रमिक अनुश्रवण उपबोर्ड हर महीने करेगा। जानिए… कैसी सहायता मिलेगी प्रवासी श्रमिक की विदेश में मृत्यु पर भारत सरकार के प्रवासी संरक्षक की सहायता से पार्थिव शरीर को सरकारी खर्च पर उसके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। कोई प्रवासी श्रमिक विदेश में आपात स्थिति में फंस जाता है, तो उसे देश के किसी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने के बाद घर या उसके निकट संबंधियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। देश के किसी राज्य में श्रमिक संकट में फंस जाता है, नियोजक द्वारा प्रताड़ित किया जाता है तो सहायता केंद्र के माध्यम से मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए प्रवासी श्रमिक या उसके परिजन प्रवासी सहायता केंद्र या जिला सहायता इकाई से संपर्क कर सकेंगे। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *