22 को आए 58 हजार, 27 व 28 को 4 किस्तों में िनकासी

आरिफ हुसैन अख्तर | गुमला साइबर ठगी के के बाद सदर थाना क्षेत्र के अरमई निवासी किसान मोरहा उरांव के आत्महत्या कर लेने के मामले को एसपी शंभु सिंह ने गंभीरता से लिया है। इसकी जांच के लिए टीम गठित की है। गठित टीम को एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव व पुलिस इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार सिंह लीड कर रहे हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान मृतक के बैक खातों को खंगाला जा रहा है। बैंक से स्टेटमेंट की मांग कर साइबर ठगी किए जाने की तिथियों को ज्ञात किया जा रहा है। किसान का अंतिम संस्कार किए जाने के बाद सदर थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार सिंह पुलिस की टीम के साथ मंगलवार को देर रात करीब 10 बजे मृतक के घर पहुंचकर पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली है। साथ ही पुलिस ने परिजनों से मोरहा का मोबाइल मांगकर मैसेज आदि चेक किया है। जिसमें साइबर अपराधियों द्वारा ओटीपी और मैसेज के जरिए 68 हजार रुपए की ठगी की गई है। इसी सदमे में आकर किसान ने आत्महत्या की है। ज्ञात हो कि किसान मोरहा ने आत्महत्या से पूर्व सुसाइड नोट लिखा था। जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। सुसाइड नोट में लिखा है, भाई जगना, प्यारी झिमी, क्षमा करना, मोबाइल में मैसेज देखना और समझ जाना। जबकि सबसे ऊपर लिखा है साइबर ठगी का शिकार। इधर पूरे घटनाक्रम को लेकर दैनिक भास्कर ने जब पूरे मामले का पड़ताल किया तो पाया कि किसान मोरहा के खाते में 22 फरवरी को राइस मिल से 58 हजार 80 रुपए भेजे गए थे। जिसके बाद 27 से 28 फरवरी के बीच किसान के खाते से चार किस्तों में साइबर ठगों ने पूरी राशि उड़ाई है। ऐसे राशि उड़ाने में साइबर ठग कौन सी तकनीक का इस्तेमाल किए थे, इसका खुलासा नहीं हो पाया है। पड़ताल में यह भी बात सामने निकल कर आई है कि राइस मिल में मोरहा उरांव का बड़ा भाई जगना टाना भगत धान का विक्रय करता था। और पेमेंट के लिए वह मोरहा के सेंट्रल बैंक का खाता दिया था। जिसके कारण मोरहा के खाते में राइस मिल का पैसा ट्रांसफर किया जाता था। बहरहाल पूरे मामले को लेकर परिजन अब भी शोकाकुल है। वहीं साइबर ठगी के बाद आत्महत्या की यह घटना पूरे राज्य में चर्चा का विषय मनी है। जिसके कारण पुलिस घटना को गंभीरता पूर्वक लेकर तेजी से कार्रवाई में जुटी है। एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव ने कहा कि पुलिस घटना से जुड़े सभी बिंदु पर जांच कर रही है। साथ ही साइबर ठगों पर कार्रवाई के लिए टेक्निकल सेल का सहारा लिया जा रहा है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *