इंडियन एकेडमिक ऑफ पीडियाट्रिक्स की गाइड लाइन के अनुसार बच्चों का स्क्रीन टाइम 24 घंटे में से केवल एक घंटा ही होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में खासकर पांच से 10 साल की उम्र के बच्चों में स्क्रीन टाइम बढ़कर साढ़े तीन घंटे हो गया है। बच्चों में मोटापा बढ़ने का यह सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। क्योंकि इसका असर बच्चे की जीवनशैली पर पड़ रहा है। विश्व मोटापा दिवस के दूसरे दिन बच्चों में तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या पर अभिभावक जागरूकता कार्यशाला में अभिभावकों से संवाद कार्यक्रम के दौरान यह बात सामने आई। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग और बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अभिभावकों की जिज्ञासाओं को शांत किया। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जीएस तंवर ने कहा कि बदलती जीवनशैली, जंक फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में मोटापे के मुख्य कारण बन रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय रहते स्वस्थ आदतें अपनाकर इस समस्या को रोका जा सकता है। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र रखा गया, जिसमें लगभग 40 अभिभावकों ने सक्रिय भाग लिया। अभिभावकों के कई महत्वपूर्ण सवालों के विस्तृत जवाब डॉ. तंवर और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने दिए। कार्यशाला में डॉ. कुलदीप सिंह बीठू, डॉ. अनिल लाहोटी, डॉ. सारिका स्वामी तथा डॉ. संजीव चाहर भी उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बचपन में मोटापे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया और समय रहते जीवनशैली में सुधार लाने की आवश्यकता पर बल दिया। ग्रोथ चार्ट की मदद से होता है बच्चे के वजन का सही आकलन


