आसोतरा से बालोतरा के बीच काम अटका

घर-घर पाइप लाइन से गैस कनेक्शन देकर प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण स्कीम सरकारी नुमांइदों की गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण पूरी नहीं हो पा रही है। हालांकि बालोतरा जिले के पचपदरा कस्बे में तो कई घरों में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति शुरू हो गई है, लेकिन जिला मुख्यालय बालोतरा व हाउसिंग बोर्ड में डेढ़ साल पहले गैस आपूर्ति के लिए लगाए गए पाइप अब जंग खाने लगे हैं। कारण सिर्फ यह कि मुख्य गैस लाइन जो आसोतरा से बालोतरा लानी है, उसके लिए एनएचआई से एनओसी नहीं मिल पा रही है। वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने एजी एंड पी प्रथम कंपनी को बाड़मेर, जैसलमेर व जोधपुर जिले में घर-घर प्राकृतिक गैस कनेक्शन देने के लिए टेंडर जारी किया था। इस कंपनी थिंक कंपनी में विलय के बाद अब थिंक कंपनी के पास यह जिम्मेदारी है, बालोतरा अलग जिला बनने से यहां का काम भी इसी कंपनी के पास है। भास्कर टीम ने जब पड़ताल की तो कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि आसोतरा से बालोतरा तक 125 एमएम की लाइन बिछाई जानी है, जो नेशनल हाइवे के नीचे या आस-पास से गुजरेगी। इसके लिए उन्होंने आवेदन कर दिया, डिमांड भर दिया, लेकिन एनएचएआई एनओसी जारी नहीं कर रहा। इधर, एनएचआई एक्सईएन रोहिताश्व सिंह गहलोत से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कुछ माह पहले ही ज्वाइन किया है, इसलिए उनकी जानकारी में नहीं है। इस पर बालोतरा जिले का कार्यभार देख रहे एईएन भागीरथ कुमार से बात की तो वे बोले, हमारे पास कोई एनओसी पेंडिंग रहती ही नहीं, यह तो मेरी भी जानकारी में नहीं है। एनएचआई ऑफिस के कार्मिक महेंद्र आचार्य से बात की तो उन्होंने बताया कि थिंक कंपनी ने बैंक गारंटी जमा करवा कर जो कागजात दिए थे, वे संबंधित बैंक की शाखा से कन्फर्मेशन के लिए मेल किए थे, लेकिन बैंक ने इसे अभी तक कन्फर्म नहीं किया, इसलिए एनओसी अटकी हुई है। इस पर कंपनी प्रतिनिधियों से फिर बात हुई तो उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बैंक ने कन्फर्म कर वापस एनएचआई ऑफिस बाड़मेर को दो बार तो मेल भेज दिया, लेकिन मामला शायद किसी लोभ के चक्कर में अटका है और हमारी कंपनी में ऐसा कोई रूल नहीं। कमोबेश जो भी हो, आमजन इस बीच केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना से वंचित है, जो उसे साल भर पहले मिल जानी चाहिए थी। प्राकृतिक गैस एक जीवाश्म ईंधन है, जो मुख्य रूप से मिथेन से बनी होती है और इसमें इथेन, प्रोपेन, और ब्यूटेन जैसे हाइड्रोकार्बन का मिश्रण होता है। यह भूमिगत चट्टानों में पेट्रोलियम के साथ पाई जाती है और इसका उपयोग ईंधन के रूप में, बिजली उत्पादन, खाना पकाने (पीएनजी) और वाहनों (सीएनजी) में किया जाता है। यह स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जो डीजल/पेट्रोल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है। सीएनजी वाहनों के लिए उपयोग की जाने वाली उच्च दबाव वाली गैस होती है। एलएनजी 160 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा की गई तरल अवस्था होती है और पीएनजी सीधे घरों और उद्योगों तक पाइप लाइन से पहुंचाई जाने वाली गैस है।

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