राजस्थान जन विश्वास उपबंधों का संशोधन विधेयक 2026 पारित:11 कानूनों में जेल का प्रावधान खत्म, खेजड़ी पर सरकार अलग से बिल लाएगी

भारी हंगामे और आरोप-प्रत्यारोपों के बीच विधानसभा में गुरुवार को राजस्थान जन विश्वास उपबंधों का संशोधन विधेयक 2026 पारित हो गया। अब 11 कानूनों में नियमों के उल्लंघन पर कारावास हटाकर सिर्फ जुर्माना का ही प्रावधान होगा। हालांकि खेजड़ी के मुद्दे पर सरकार ने कहा कि इसके लिए अलग कानून आएगा। इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि खेजड़ी काटने पर सख्त सजा हो, इसलिए अलग से बिल लाया जाएगा।
उप सचेतक रफीक खान ने कहा 11 कानूनों में एक ही दिन में बदलाव पीएम नरेंद्र मोदी के कहने पर किया जा रहा है। खेजड़ी काटने वाली कंपनियों को सजा नहीं हो, इसलिए सिर्फ जुर्माने का प्रावधान किया है। इस पर पटेल ने कहा कि अभी तो मोदी का ही कानून चलेगा। चाहे कुछ भी कर लो। विपक्ष ने कहा कि संशोधन विधेयक के पारित होने से नौकरशाह निरंकुश हो जाएंगे। सरकार को इस बिल को जनमत जानने और पुनर्विचार के लिए भेजना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार से विश्वास तो सवा दो साल में ही खत्म हो गया, लेकिन दिल्ली से पर्ची आई है क्योंकि केंद्र सरकार ने संशोधन किया है तो राज्य को भी इसमें संशोधन करना है। विधेयक पर चर्चा के पूर्व संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि इस बिल से 11 एक्ट में संशोधन करने जा रहे हैं। जिस विभाग के जो मंत्री हैं, उनको जवाब देना पड़ेगा। सारे संशोधन एक साथ नहीं कर सकते। यहां वन मंत्री नहीं हैं और आप 11 संशोधन गलत लेकर आए हो, जबकि शिक्षा मंत्री भी यहां पर मौजूद नहीं हैं। वहीं विधायक नरेंद्र बुडानिया ने कहा कि संशोधन सोच-समझकर नहीं किया गया है और अधिकारियों के कहने पर इसे लेकर आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल से बड़े लोगों को लाभ होगा। यह विधेयक जनता के हित में नहीं है। सरकार इस बिल के जरिए कुछ लोगों को लाभ पहुंचाना चाहती है और इससे अपराधियों का हौसला बढ़ेगा। वन माफिया, सोलर माफिया के लिए लाए बिल
विधायक रफीक खान ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इस बिल में 11 कानून शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खेजड़ी काटने वालों पर कार्रवाई ना हो सके, इसलिए यह बिल लाया गया है। शेर पढ़ा- ‘उजाले की किरण मांगी थी, आपने और आग लगाने का ऑर्डर दे दिया’। वन अधिनियम के अंदर तमाम माफिया को फ्री कर दिया गया है और वन माफिया व सोलर वालों के लिए संशोधन किया जा रहा है। मंत्री बोले- खेजड़ी पर पहले 100 रुपए की पेनल्टी थी, अब 1000
मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि कानून जन विश्वास विधेयक है। कई सदस्यों ने कहा कि यह अडानी के लिए किया गया है। क्या प्रतिबंधित फॉरेस्ट एरिया में अडानी-अंबानी फैक्ट्री लगाएंगे? फॉरेस्ट एरिया में आदिवासी रहते हैं। न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकारों में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। खेजड़ी काटने पर पहले सिर्फ 100 रुपए की पेनल्टी थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 1000 रुपए किया है। मैं उस क्षेत्र से आता हूं,जहां सबसे अधिक खेजड़ी पाई जाती है। सबको खेजड़ली आना चाहिए। उद्योगपतियों को बचाने के लिए यह बिल लाया गया है : कांग्रेस
कांग्रेस विधायक डूंगर राम गेदर ने कहा कि चंद उद्योगपतियों को फायदा देने के लिए बिल में संशोधन हुआ है। लोगों में थोड़ा बहुत डर कोर्ट से मिलने वाली सजा का था, लेकिन अब कोर्ट की सजा को हटाकर जुर्माने का प्रावधान किया जा रहा है। बिजनेसमैन तो कोर्ट की सजा से डरते थे, लेकिन जुर्माना तो कितना भी लगा दो, सब भर देंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में सौर ऊर्जा के प्लांट लगे हैं, वहां बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। विपक्ष का आरोप- केंद्र के इशारे पर खेजड़ी को लेकर बिल नहीं आया
संसदीय मंत्री ने कहा- अभी तो मोदी का ही कानून चलेगा, कुछ भी कर लो जल लाइन से छेड़छाड़ पर 10 हजार रु. और स्टांप चोरी में सिर्फ 5 हजार जुर्माना वन अधिनियम, 1953
प्रावधान : आरक्षित व संरक्षित वन में अतिक्रमण, पशु चराना, पेड़ गिराना या नुकसान पहुंचाना।
अभी : 6 माह सजा या 500 रु. जुर्माना
संशोधन : जुर्माना 5 हजार व क्षतिपूर्ति 25 हजार रुपए। अभिधृति अधिनियम 1955
प्रावधान : अवैध रूप से पेड़ हटाने या नियम उल्लंघन।
अभी : 100 रुपए जुर्माना
संशोधन : पहली बार 1000 रुपए और दुबारा दोगुना जुर्माना। वेयरहाउस अधिनियम, 1958
प्रावधान : गोदाम या भंडारण नियमों का उल्लंघन पर सजा।
अभी : प्रशासनिक दंड के विरुद्ध अपील
संशोधन : 50 हजार रु. जुर्माना। राज्य सहा. उद्योग अधि. 1961
प्रावधान : दस्तावेज निरीक्षण उल्लंघन करने पर।
मौजूदा : कारावास
संशोधन : जुर्माना लगाया विद्युत शुल्क अधिनियम 1962
प्रावधान : निरीक्षण से रोकना मौजूदा : 6 माह की सजा
संशोधन : अब केवल जुर्माना। साहूकार अधिनियम 1963
प्रावधान : बिना लाइसेंस साहूकारी
मौजूदा : कारावास
संशोधन : पहली बार 25 हजार, दूसरी बार 50 हजार जुर्माना गैर सरकारी शैक्षिक संस्था.. प्रावधान : सरकारी निर्देशों की अवहेलना या रिकॉर्ड चूक।
मौजूदा : जेल का प्रावधान
संशोधन : 2 लाख तक जुर्माना स्टांप अधिनियम 1998
प्रावधान : स्टांप ड्यूटी की चोरी
मौजूदा : 6 माह से 3 साल तक की सजा
संशोधन : 5 हजार तक जुर्माना। नगर पालिका अधि. 2009
प्रावधान : भवन निर्माण के नियमों में उल्लंघन, अतिक्रमण
मौजूदा : कारावास
संशोधन : 30 हजार से 50 हजार रुपए तक जुर्माना जल प्रदाय, मल वहन बोर्ड अधि. प्रावधान : जल लाइनों में अवैध कनेक्शन, मीटर से छेड़छाड़
मौजूदा : जेल की सजा का प्रावधान
संशोधन : 10 हजार तक जुर्माना। नौचालन विनियमन अधि. 1956
प्रावधान : बिना नियम के नाव चलाना या उसका संचालन कराना।
अभी : कैद व 500 रु. तक जुर्माना।
संशोधन : 50,000 रु. तक जुर्माना।

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