डीडवाना में माथुर (कायस्थ) समाज ने होली के बाद चैत्र कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान चित्रगुप्त का विधि-विधान से पूजन किया। इस अवसर पर समाज बंधुओं ने भगवान चित्रगुप्त के साथ कलम और दवात की पूजा कर ज्ञान, अच्छी आय और पापों से मुक्ति का आशीर्वाद मांगा। कायस्थ समाज के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त यमराज के सहायक हैं और वे मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। इसी कारण उन्हें बुद्धि, ज्ञान, लेखन और न्याय का देवता माना जाता है। पूजन के दौरान, समाज के लोगों ने कलम-दवात का पूजन कर विद्या, बुद्धि और जीवन में सफलता की कामना की। कायस्थ समाज परंपरागत रूप से लेखन और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ा रहा है, इसलिए यह पर्व उनके लिए विशेष आस्था का प्रतीक है।
कायस्थ समाज द्वारा यह विशेष पूजन दीपावली और होली के बाद आने वाली द्वितीया तिथि को किया जाता है। इसमें भगवान चित्रगुप्त के साथ कलम-दवात की पूजा की जाती है।
इस पूजन में समाज के रामचंद्र माथुर और राजेंद्र माथुर सहित कई समाज बंधु मौजूद रहे। सभी ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की।


