मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव ने उदयपुर के पर्यटन कारोबार को काफी कमजोर कर दिया है। हालात यही रहे तो अगले 2 महीने में इस सेक्टर की कमर टूटनी तय है। 15 मार्च से झीलों की नगरी में पर्यटन का पीक सीजन शुरू होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही इंटरनेशनल फ्लाइट्स के रद्द होने और हवाई मार्गों में बदलाव ने पर्यटकों के कदम पूरी तरह रोक दिए हैं। एक अनुमानित आकंडे के आधार पर इन हालातों से मार्केट में सीधे 40 से 50 फीसदी पर्यटकों की कमी हुई है। कई देशों में बिगड़ते हालातों के चलते लोग डरे हुए हैं और बच्चों की छुट्टियों के लिए बनाई गई अपनी पूरी ट्रैवल प्लानिंग को फिलहाल टाल रहे हैं। खाड़ी देशों से आने वाले पर्यटकों का ग्राफ भी तेजी से गिरा है। उदयपुर में 1500 से ज्यादा होटल, रिसोर्ट्स और होमस्टे-विला है, ऐसे में इस सेक्टर की इकॉनामी बिगड़ने की आशंका है। उदयपुर के स्थानीय पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच यूरोप से आने वाले पर्यटकों की लगभग सभी बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। इन देशों के अलावा भारत के कई इलाकों के लोग ऐसे माहौल के बीच घूमना पसंद करते है। इसी तरह उदयपुर और भारत के अन्य हिस्सों से यूरोप जाने वाले टूरिस्ट भी एयर स्पेस की पाबंदियों के कारण बीच में ही फंसे हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिजनेस ट्रैवलर भी शामिल हैं, जो अपने काम के सिलसिले में विदेश जा रहे थे। पर्यटन विशेषज्ञों के मुताबिक रमजान और ईद के दौरान बड़ी संख्या में खाड़ी देशों के सैलानी हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली, आगरा और राजस्थान घूमने आते हैं। इस बार अचानक बने युद्ध के हालात की वजह से इन यात्राओं पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। भारत सरकार ने भी ईरान और इजराइल के रूट पर यात्रा करने वालों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर उन्हें सतर्क रहने और फिलहाल यात्रा से बचने की सलाह दी है। उदयपुर होटल एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी इस संकट के कारण भारतीय पर्यटकों के विदेश जाने की संख्या में 90 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। ट्रैवल एजेंसियों के पास बुकिंग्स कैंसिल कराने वालों की लंबी कतार लगी है। सबसे बड़ी समस्या अब रिफंड को लेकर आ रही है। हालांकि एयरलाइंस की ओर से कुछ मामलों में रिफंड मिल रहा है, लेकिन होटल बुकिंग का पैसा वापस लेने में सैलानियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पर्यटन विभाग की उपनिदेशक शिखा सक्सेना का कहना है कि युद्ध के कारण कई भारतीय पर्यटक मिडिल ईस्ट के देशों में फंस गए हैं। उन्हें सुरक्षित स्वदेश वापस लाने के लिए भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन की मदद से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसका असर इंडिया और उदयपुर के लोकल पर्यटन क्षेत्र पर भी है। विभाग इसको लेकर भी उच्च अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट कर चुका हैं। ग्लिम्पसेस ऑफ राजस्थान के निदेशक आनंद सिंह शक्तावत ने बताया कि मिडिल ईस्ट के एयर स्पेस बंद होने से यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से भारत आने वाले कई ग्रुप टूर भी कैंसिल हो गए हैं, जिससे पर्यटन उद्योग को दोहरा झटका लगा है।


