झुंझुनूं के ग्रामीण क्षेत्रों को ‘निरोगी’ बनाने के लिए सरकार ने आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना शुरू की है। योजना के तहत जिले के पांच गांवों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि अब इन गांवों के आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में भी रक्तचाप (BP), मधुमेह (शुगर) और एनीमिया जैसी बुनियादी जांचें की जाएंगी। इससे ग्रामीणों को सामान्य स्वास्थ्य जांच के लिए शहरों के बड़े हॉस्पिटलों या एलोपैथी केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और गांव में ही प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. जितेंद्र स्वामी के अनुसार इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और आधुनिक जांच सुविधाओं को जोड़कर हर नागरिक का विस्तृत हेल्थ प्रोफाइल तैयार करना है। इससे बीमारियों की समय रहते पहचान हो सकेगी और इलाज भी जल्दी शुरू किया जा सकेगा। बजट घोषणा 2025-26 में चयनित हुए पांच गांव राज्य सरकार की बजट घोषणा 2025-26 के तहत झुंझुनूं जिले के पांच गांवों को इस मॉडल प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। पहले सूची में शामिल बाडलवासा अब नगरीय निकाय में शामिल हो चुका है, इसलिए उसकी जगह भड़ौंदा खुर्द का नाम प्रस्तावित किया गया है। चयनित गांव इन गांवों में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर ग्रामीणों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आयुर्वेद अस्पतालों में मिलेंगी ये नई सुविधाएं आमतौर पर आयुर्वेदिक अस्पतालों को केवल काढ़ा और जड़ी-बूटियों तक सीमित माना जाता रहा है, लेकिन इस योजना के तहत इनके दायरे को बढ़ाया जा रहा है। अब यहां कई महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। 18 मानकों पर होगा गांवों का मूल्यांकन, बनेगा हेल्थ प्रोफाइल किसी भी गांव को ‘आयुष्मान आदर्श ग्राम’ का दर्जा तभी मिलेगा जब वह 18 निर्धारित मानकों पर खरा उतरेगा। इन मानकों के आधार पर पूरे गांव का विस्तृत स्वास्थ्य आकलन किया जाएगा।


