राजधानी में बच्चों के सबसे बड़े जेके लोन अस्पताल का ‘डाइजेस्टिव सिस्टम फेल्योर’ हो चुका है। अस्पताल में बच्चों से संबंधित आंतों की बीमारी का इलाज लिवर डॉक्टर के भरोसे है। जेके लोन में हर माह 110 से 130 आंतों की बीमारी से जुड़े गंभीर मरीज पहुंच रहे हैं। 2025 में ही डायरिया के करीब 28 हजार मरीज पहुंचे। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में पिछले 15 साल से आंतों से जुड़ी बीमारियों पेट दर्द, उल्टी-दस्त, कब्ज, डायरिया, कुपोषण, ग्लूटेन एलर्जी का इलाज करने वाला पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट ही नहीं है। गत 2 वर्ष से संविदा पर पीडियाट्रिक हेपेटोलॉजिस्ट तैनात हैं, जो बच्चों की आंत संबंधी बीमारियों का इलाज कर रहे। पीडियाट्रिक हेपेटोलॉजिस्ट मुख्य रूप से वायरल हेपेटाइटिस, पीलिया और लिवर से जुड़ी बीमारियों का इलाज करता है। ऐसे में अल्सरेटिव कोलाइटिस, पैंक्रिएटाइटिस और रिफ्रैक्टिव डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में दिक्कतें आ रही हैं। प्रदेश में पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट सुपर स्पेशलिटी के चार ही डॉक्टर हैं, जिनमें से एक अजमेर के सरकारी और तीन जयपुर के निजी अस्पतालों में कार्यरत हैं। प्रदेश में पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के 4 डॉक्टर, 1 सरकारी व 3 निजी अस्पतालों में कार्यरत भास्कर एक्सपर्ट- डॉ. ललित भराड़िया, शिशु पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ प्रदेश में बच्चों की 30 से 35 फीसदी बीमारियां पेट और लिवर से संबंधित होती हैं। इनमें से 10 से 20 फीसदी गंभीर बीमारियां होती हैं, जैसे- लिवर फेल्योर, उल्टी या मल के साथ खून आना, पेट में पानी भरना, पीलिया, आंतों की बनावट में खराबी के कारण पाचन तंत्र का सही विकास न होना, पैंक्रिएटाइटिस, बड़ी आंत में अल्सर ऐसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां हैं, जिनमें समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चों की जान जा सकती है। केस-1; नागौर निवासी 4 वर्षीय आदित्य ने बचपन में थिनर पी लिया। दिक्कत बढ़ी तो परिजन जनवरी में जेके लोन अस्पताल लाए। आहार नली बार-बार चिपक जाने से बच्चे को खाना-पीना निगलने में परेशानी हो रही। एंडोस्कोपी से आहार नली को बार-बार खोलना पड़ता है। जेके लोन में यह सुविधा नहीं होने से परिजनों को मजबूरन निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ रहा। केस-2; अजमेर निवासी 5 वर्षीय इशिका सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित है। उसे खाना निगलने में दिक्कत होती है। डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी के जरिए पेट के रास्ते फीडिंग ट्यूब डालने और समय-समय पर नली बदलने की सलाह दी है। जेके लोन में यह सुविधा भी उपलब्ध नहीं। मरीज को इलाज के लिए दिल्ली और अहमदाबाद जाना पड़ रहा है। इसलिए भी यह गंभीर मुद्दा… 1. सीलियक डिजीज में राजस्थान देश में पहले नंबर पर; गेहूं से होने वाली एलर्जी सीलियक डिजीज के मामलों में राजस्थान देश में पहले स्थान पर है। कुपोषित बच्चों के 25 प्रतिशत मामलों में सीलियक डिजीज होना सामने आया। 2. प्रदेश में हर साल 3900 बच्चों की डायरिया से मौत; चिकित्सा विभाग की तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने दो साल पहले बैठक में डायरिया से बच्चों की मौतों पर चिंता जताई थी। प्रदेश में हर वर्ष 3,900 बच्चों की मौत डायरिया से होती है। स्टॉप डायरिया अभियान चलाने व मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट लगाने का मुद्दा उठाया था। आवश्यक कार्रवाई करेंगे
अस्पताल में पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट के पद पर पीडियाट्रिक हेपेटोलॉजिस्ट लगा रखा है। यह बच्चों से जुड़ा गंभीर मामला है। जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
-डॉ. आरएन सेहरा, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल, जयपुर


