चंडीगढ़ किडनैपिंग और दुष्कर्म केस में आरोपी बरी:14 साल पुराना मामला, साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने दी राहत,2012 में लड़की बरामद

चंडीगढ़ की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने 14 साल पुराने किडनैपिंग और दुष्कर्म मामले में आरोपी संजय को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकारी वकील आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की जज डॉ. याशिका की अदालत में हुई। पुलिस स्टेशन सेक्टर-36 में दर्ज एफआईआर के अनुसार घटना 12 सितंबर 2012 की बताई गई थी। शिकायतकर्ता, जो पीड़िता का पिता है, ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि उसकी बेटी 12 सितंबर की सुबह स्कूल जाने के बाद लापता हो गई थी। उसे संदेह था कि नेहरू कॉलोनी, सेक्टर-53 निवासी संजय ने उसका अपहरण किया है। 2012 में लड़की बरामद पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक लड़की को 14 सितंबर 2012 को बरामद किया गया था। इसके बाद उसके बयान के आधार पर 17 सितंबर 2012 को आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 369 और 376 के तहत मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि धमकियों के कारण 14 सितंबर को पीड़िता की मेडिकल जांच नहीं कराई जा सकी। आरोपी बाद में लंबे समय तक फरार रहा और वर्ष 2024 तक उद्घोषित अपराधी (पीओ) भी घोषित रहा। बचाव पक्ष ने गिनाई जांच में खामियां सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से एडवोकेट मंदीप कुमार और कशिश जैन ने पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विरोधाभास और सबूतों की कमी को अदालत के सामने रखा। एडवोकेट मंदीप कुमार ने अदालत को बताया कि शिकायत में कहा गया है कि पीड़िता का अपहरण 12 सितंबर 2012 को हुआ, जबकि बचाव पक्ष द्वारा पेश स्कूल की उपस्थिति रजिस्टर के अनुसार उस दिन पीड़िता स्कूल में मौजूद थी। इसे आरोपों में बड़ा विरोधाभास बताया गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की 14 सितंबर 2012 को बरामदगी हुई, जबकि जांच अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि अपहरण 14 सितंबर को किया गया था, जिससे मामले में गंभीर असंगतियां सामने आती हैं। वहीं एडवोकेट कशिश जैन ने दलील दी कि पुलिस जांच में कई खामियां हैं। पीड़िता की कथित बरामदगी के स्थान, तारीख और समय की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया। इसके अलावा एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी का भी संतोषजनक कारण रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। आरोप साबित नहीं कर सका सरकारी वकील दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि सरकारी वकील आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पुख्ता तरीके से साबित नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयान और बचाव पक्ष के सबूत आपस में मेल नहीं खाते। इसके अलावा एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी का भी कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। इन्हीं कारणों को देखते हुए अदालत ने आरोपी संजय को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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