विधानसभा में बुधवार को रायपुर में सिकलसेल संस्थान के निर्माण को लेकर सत्तापक्ष के विधायक अजय चंद्राकर ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को घेरने का प्रयास किया। चंद्राकर ने कहा कि इसका न तो खुद का भवन है न इलाज की व्यवस्था, न ही पर्याप्त विशेषज्ञ। लाखों रुपए की मशीनें भी डंप पड़ी हुई हैं। ध्यानाकर्षण के दौरान उठाए गए इस मुद्दे पर पलटवार करते हुए स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि पीड़ा होती है कि यह 2013 का मामला है। कौन-कौन स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं, मैं नाम नहीं लेना चाहता। लेकिन हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके ड्राइंग-डिजाइन में भारत सरकार के मॉडल के हिसाब से बदलाव कराए जा रहे हैं। जून तक इसका निर्माण शुरू हो जाएगा। चंद्राकर- इसका सेटअप कितने का है? कितने डॉक्टर हैं, भर्ती के लिए क्या कर रहे?
जायसवाल- प्रदेश में सिकलसेल के लिए बड़ा काम किया गया है। 23 जून 2023 को भूपेश सरकार ने आनन-फामें सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के लिए भूमिपूजन कर लिया था। 180 का सेटअप है. 28 कार्यरत हैं। इनमें से 4 विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। हमारा प्रयास होगा कि जल्द से जल्द डॉक्टरों की भर्ती की जाए। जब तक भर्ती नहीं होती तब तक डॉक्टरों को अटैच कर कार्यवाही की जाएगी। भर्ती पीएससी से होती है। सेटअप स्वीकृत है। जल्द भर्ती करेंगे। चंद्राकर- इलाज के नाम पर ओपीडी में सिर्फ दवा दी जाती है?
जायसवाल- दवा के साथ ही सॉलुबिलिटी एवं इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच भी की जा रही है। चंद्राकर- कितनी मशीनें हैं, टेक्नीशियन हैं कि नहीं? सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में सुविधाएं कब तक शुरू हो पांएगी?
जायसवाल- 4 मशीनें उपलब्ध हैं। रोज जांच हो रही है। यहां नौ टेक्नीशियन कार्यरत हैं। पूर्व निर्धारित डिजाइन के तहत बोन मेरो ट्रांसप्लांट की अनुमति केंद्र से नहीं मिलती इसलिए भारत सरकार के मॉडल के आधार पर इसका डिजाइन कराया जा रहा है। चंद्राकर- इसमें आर्थिक अनियमितता की कोई शिकायत आई है?
जायसवाल- इस तरह की कोई शिकायत नहीं हुई है। आपके पास दस्तावेज हैं तो उपलब्ध करवा दीजिए, जांच करने लायक होगा तो जांच कराएंगे। स्कूलों को दिए गए लैपटाप वापस क्यों ले लिए : लहरे कांग्रेस विधायक कविता प्राण लहरे ने पूछा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में दिए गए लैपटाप क्यों वापस ले लिए गए। उन्होंने कहा कि इनका उपयोग कहां किया गया। इसके जवाब में श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि समग्र शिक्षा के तहत स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित किए गए थे। इसके तहत लैपटाप और कम्प्यूटर प्रदान किए गए थे। लेकिन 2020-21 में भारत शासन द्वारा स्वीकृत सूची में संशोधन किया गया और आवश्यक्ता से अधिक लैपटाप और कम्प्यूटर को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है। 56 करोड़ की जमीन बिल्डर को 9 करोड़ में कैसे दी, कौशिक ने राजस्व मंत्री को घेरा अमलीडीह की जमीन बिल्डर को देने पर घिरे टंकराम वर्मा भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को जमकर घेरा। कौशिक ने कहा कि राजधानी रायपुर के अमलीडीह में 56 करोड़ की सरकारी जमीन निजी बिल्डर को 9 करोड़ रुपए में कैसे दे दी गई। इस मामले में जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। इस पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि बिल्डर को जमीन आवंटित ही नहीं की गई है तो नौ करोड़ लेने की बात ही नहीं है। दरअसल प्रश्नकाल में कौशिक ने पूछा कि रायपुर के अमलीडीह में चराई की जमीन किसी का आवंटित नहीं किया जा सकता। जबकि उत्तर में स्पष्ट है कि इसे एक निजी बिल्डर को नौ करोड़ रुपए में दिया गया है। इस पर राजस्व मंत्री ने कहा कि जमीन राज्य शासन के नाम पर इसे किसी भी बिल्डर को आवंटित नहीं किया गया है। वर्मा ने बताया कि जमीन पर अतिक्रमण के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। जिसकी जांच रायपुर संभागायुक्त से कराई गई। जांच प्रतिवेदन 11 दिसंबर 2024 के अनुसार निजी बिल्डर को आबंटित शासकीय भूमि को निरस्त करने की अनुशंसा की गई। इसके तारतम्य में विभागीय आदेश 17 दिसंबर जारी हुआ।


