पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक राजेश मूणत की अश्लील सीडी के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बरी (उन्मोचित) कर दिया है। मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत के 6 पेज के फैसले में उन बातों का जिक्र है, जो भूपेश को राहत देने का आधार बना। लंबी जांच के बाद भी सीबीआई साबित ही नहीं कर पाई कि तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश ने अश्लील सीडी बांटी है। उनके खिलाफ सबूत भी नहीं जुटा पाए। सीबीआई ने जिन्हें गवाह बनाया था, उन्होंने कोर्ट में कहा है कि सीडी की प्रति किसने दी थी, उन्हें इसकी जानकारी नहीं। बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया है कि योगेश शेंडे, विकास तिवारी और जयप्रकाश त्रिपाठी का सीबीआई ने बयान दर्ज किया है। तीनों ने अपने बयान में कहा है कि सीडी की प्रति किसने दी है। इसकी जानकारी नहीं है। भूपेश के सरकारी आवास में 27 अक्टूबर की सुबह 6 बजे प्रेस कांफ्रेंस रखी गई थी। इसमें सीडी लहराकर सांकेतिक विरोध किया जा रहा था कि हमारे पास भी सीडी है, हमें भी गिरफ्तार किया जाए। इससे साबित होता है कि कांफ्रेंस में पूर्व मंत्री की अश्लील सीडी नहीं बांटी गई। भूपेश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष किसी भी तरह से अश्लील वीडियो के टेंपर में शामिल नहीं थे। उन्होंने इसे शेयर या प्रचारित नहीं किया है। सीडी बनाने मुरारका ने दिए 75 लाख : सीबीआई का दावा है कि कारोबारी कैलाश मुरारका, विजय भाटिया और रिंक खनूजा ने मिलकर पूर्व मंत्री राजेश मूणत की अश्लील सीडी बनाने की साजिश रची। मुरारका ने 75 लाख रिंकू खनूजा व विजय पांड्या को दिए। रिंकू व विजय ने मुंबई के मानस साहू से संपर्क किया। मुंबई के स्टूडियों में मूणत के फोटो से चेहरा निकालकर अश्लील वीडियो में लगाया गया। वीडियो को पैन ड्राइव और सीडी में रायपुर लाया गया। यह वीडियो मुरारका ने विजय को दिया। विनोद और विजय ने वीडियो की 500 सीडी में कॉपी कराई। इसके लिए 9500 रुपए का भुगतान किया गया। यही सीडी विनोद वर्मा के घर से जब्त की गई। इस वीडियो को दिल्ली और छत्तीसगढ़ के कई लोगांे को मोबाइल पर भी भेजा गया था। कोर्ट का तर्क: तथ्यों का अभाव सीबीआई कोर्ट ने पांचों आरोपी और सीबीआई के तर्क के बाद फैसला दिया है कि भूपेश बघेल दिल्ली में विजय भाटिया के साथ होटल में थे। अपराधी के साथ रहने से अपराध साबित नहीं होता है। कोर्ट ने माना कि सीबीआई ने जो गवाह पेश किए हैं, उनके बयान से भी अश्लील सीडी बांटना साबित नहीं होता है। दो व्यक्तियों के बीच होने वाले फोन कॉल से किसी भी संदेह को उत्पन्न होना नहीं कहा जा सकता है। भूपेश का अन्य आरोपियों के साथ होना जो सीबीआई की ओर स्थापित किया है। इससे किसी प्रकार की आपराधिक साजिश किए जाने का अभाव है। अश्लील सीडी वितरण किए जाने वाले तथ्यों का अभाव है। इससे दोष सिद्ध होने की संभावना नहीं है। इसलिए आरोपी भूपेश को धारा 469, 471, 120 बी और धारा 67 आईटी एक्ट के अपराध से उन्मोचित किया जाता है।


