आज के युग में अग्नि और बिजली के बिना रहना असंभव लगता है लेकिन, राजस्थान का एक ऐसा परिवार है जिसकी एक हादसे ने जिंदगी बदल दी। पिछले 7 साल से ये परिवार बिना लाइट के रह रहा है। ऐसा नहीं है कि सरकार इन्हें लाइट का कनेक्शन नहीं दे रही है। बल्कि एक हादसे के बाद परिवार ने लाइट का कनेक्शन ही कटवा दिया। ये लोग रात में बाहर सोते हैं और अपना फ़ोन पड़ोसी के यहां चार्ज करते हैं। पति-पत्नी कहते हैं- गर्मी लगती है, रात को डर भी लगता है लेकिन, उस दिन करंट फैला तो हमने तय कर लिया कि बिजली का यूज नहीं करेंगे। समय रहते उस दिन तो बचाव हो गया, नहीं तो सब खत्म हो जाता। पढ़िए पाली के आउवा गांव के सालाराम की 7 साल की कहानी… पहले देखिए अंधेरे में रोशनी की 2 तस्वीरें… 7 बच्चों को दंपती की कहानी पाली जिला मुख्यालय से करीब 50 KM की दूरी पर ऐतिहासिक गांव आऊवा स्थित है। जो 1857 की क्रांति को लेकर प्रसिद्ध है। इसी गांव में 45 साल के सालाराम पुत्र फूलाराम अपनी पत्नी डिंपल और 7 बच्चों के साथ रहते हैं। सालाराम मजदूरी कर अपना घर चलाते हैं। सालाराम से 7 साल बिना लाइट के रहने को लेकर सवाल किया तो वो पुरानी यादों में खो गए। आंगन-चौक में फैल गया था करंट सालाराम कहते हैं- हमारा घर करीब 555 गज का है। यहां मैं अपने परिवार के साथ रहता हूं। 7 साल पहले, लाइट का कनेक्शन था। बिजली का तार हमारे घर के आंगन में गिर गया था। इस दौरान इससे घर में करंट फैल गया। हम पीछे के कमरों में थे, तार गिरने से चौक और आंगन में करंट आ रहा था। इसके बाद लाइटमैन को बुलाया और ठीक करवाया। मैं न होता तो परिवार खत्म हो गया होता सालाराम कहते हैं- इसके बाद मेरे दिल में बिजली को लेकर डर बैठ गया। वो मैं उस दिन घर पर था तो पूरे परिवार का बचाव हो गया। मेरी सोच कर रूह कांप उठती है कि अगर मैं घर पर नहीं होता तो मेरा पूरा परिवार खत्म हो सकता था। सालाराम कहते हैं- इसके बाद मैंने लाइट का कनेक्शन कटवा दिया और इसी के बिना जीना पाने बच्चों को सिखाया। पड़ोसी के घर पर चार्ज करते हैं फोन सालाराम ने बताया कि उनके घर में मोबाइल है। जो उनकी बड़ी बेटी के पास रहता है और वह मजदूरी पर जाती है। घर में लाइट नहीं है। ऐसे में पड़ोसी के यहां मोबाइल चार्ज करते है। मकान कच्चा बना हुआ है, जिसमें दो कमरे बने हुए हैं। बच्चे अभी छोटे हैं। जब बड़े हो जाएंगे तब फिर से लाइट कनेक्शन लेने के बारे में सोचेंगे। दीपक की रोशनी में बनता है खाना सालाराम की पत्नी डिम्पल बताती है कि अब तो बिना लाइट के रहने की आदत पड़ गई है। घर के आंगन में खुले में सोते हैं। शाम ढलने से पहले खाना बना लेते हैं। हां कभी कभी रात को मच्छर जरूर काटते हैं। दो बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं। घर में लाइट नहीं होने के चलते बच्चों को शाम ढलने के बाद पढ़ने और होम वर्क करने में परेशानी होती है। इसके चलते वे दीपक जलाकर पढ़ाई करते हैं। वहीं शाम का खाना दीपक की रोशनी में ही बनाया जाता है। दीये की लो से भी हो चुका हादसा डिंपल बताती हैं- 24 जनवरी 2026 को दीये के कारण हादसा हो गया था। शाम के समय दीपक की रोशनी में खाना बनाया जा रहा था। इस दौरान 15 साल की बेटी किरण के कपड़े जलते हुए दीये की चपेट में आ गए। जिससे वह झुलस गई। इलाज के लिए उसे पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लाया गया। जहां उसका उपचार किया गया था।


