केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की टीम जोगेंद्र कुमार सक्सेना के नेतृत्व में बुधवार दोपहर करीब 3 बजे पीथमपुर के तारपुरा पहुंची। यहां तारपुरा सहित आसपास के इलाकों से पानी के सैंपल लिए। प्रदूषण बोर्ड के जोगेंद्र सक्सेना ने कहा कि इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि यह प्रदूषित है या नहीं। सोमवार को भी गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह के नेतृत्व में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उनके क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकारियों ने कॉमन हैजर्ड्स वेस्ट ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोजल फैसिलिटी का दौरा किया था। 2015 में ट्रायल के तौर पर जला था 10 टन कचरा इस बीच दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि 2015 में जिस रामकी कंपनी (आर ई सस्टेनेबिलिटी लिमिटेड) के इंसिनरेटर में यूनियन कार्बाइड का 10 टन कचरा ट्रायल के तौर पर जलाया गया था। उससे सटे 50 बीघा खेत पूरी तरह बंजर हो चुके हैं। पास के नाले में अब भी दूषित लाल पानी आता है, जिसके कारण लोगों को स्किन इंफेक्शन, सांस संबंधी परेशानियां हो रही हैं। 8 किमी दूर तक के किसान अब भी पूरी फसल नहीं ले पा रहे हैं। खुद सरकार की अनावरी रिपोर्ट बता रही है कि फसलों का उत्पादन 98% तक घट गया है। भास्कर ने कंपनी के आसपास के 8 गांवों में एक्सपर्ट के साथ रिसर्च की। सामने आया कि कचरे के पहाड़ से जहरीला धुआं निकल रहा है। बता दें कि हाईकोर्ट ने पीथमपुर में भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे (यूनियन कार्बाइड) को जलाने के आदेश दिए हैं। इसके बाद से यहां के लोगों में दहशत है। कचरा डाउ केमिकल को सौंपने की मांग भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का 337 टन जहरीला कचरा पीथमपुर में नष्ट होना है। इसमें कुल 126 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 6 जनवरी से पहले कचरे को पीथमपुर पहुंचाना है। इसी बीच गैस पीड़ित संगठनों ने फिर से एक बार यह कचरा डाउ केमिकल को सौंपने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि कचरा पीथमपुर पहुंचा तो वहां के भूजल को भी प्रदूषित कर देगा। साढ़े 3 महीने तक जलाया जाना है भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने कहा कि भोपाल से निकलने वाले खतरनाक कचरे को साढ़े 3 महीने तक जलाया जाना है। इतने लंबे समय तक भस्मक से निकलने वाले धुएं में जहर और पार्टिकुलेट मैटर के चपेट में आने वाली आबादी की संख्या एक लाख से भी अधिक है। वर्तमान में जो काम जारी है, वह जानबूझकर सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक हादसा पैदा करने से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि यूका फैक्टरी से कुल 337 टन कचरा हटना है। इसके बदले में पीथमपुर में यह तीन गुना बढ़ जाएगा, जो अत्यंत जहरीला रहेगा और पूरे पीथमपुर और आसपास के भूजल को प्रदूषित कर देगा। वर्तमान में भोपाल स्थित फैक्टरी में 21 जगह पर कचरा दबा है। वहीं बाहर भी हजारों टन कचरा है, जिससे 42 बस्तियों का भूजल प्रभावित है। जिम्मेदारों को प्रदूषित होते भूजल को रोकना चाहिए। गैस पीड़ित संगठन के बालकृष्ण नामदेव ने भी जहरीले कचरे से पीथमपुर में होने वाले नुकसान के बारे में बताया।


