भास्कर न्यूज | जालंधर सरकार बसंत के मौसम में गन्ने की बुवाई का रकबा बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है ताकि पैदावार के साथ-साथ चीनी की रिकवरी भी बढ़ाई जा सके। कोऑपरेटिव और प्राइवेट शुगर मिलों का फील्ड स्टाफ गांवों में किसानों के साथ मीटिंग कर रहा है और उन्हें गन्ने की फसल का रकबा बढ़ाने के लिए मोटिवेट कर रहे हैं। भोगपुर कोऑपरेटिव शुगर मिल लिमिटेड ने गांव किशनपुरा में किसानों के साथ मीटिंग की, जिसमें केन कमिश्नर पंजाब डॉ. अमरीक सिंह खास तौर पर पहुंचे। किसानों से बात करते उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती में बुवाई से लेकर कटाई तक ज़्यादा मजदूरों की ज़रूरत होती है, लेकिन मौजूदा हालात की वजह से मजदूरों की कमी है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की कमी की वजह से गन्ना किसानों में गन्ने की कटाई करने वाली मशीनों का ट्रेंड बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि ढाई फीट की दूरी पर बुवाई करने से मशीन से कटाई करना मुश्किल हो जाता है, जिससे गन्ना किसानों और मिल मैनेजरों को पैसे का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से गन्ना किसानों में गन्ने की फसल को ज़्यादा दूरी पर बोने का ट्रेंड और गन्ने की कटाई के लिए गन्ने की हार्वेस्टर का ट्रेंड भी बढ़ा है, इसलिए ज़्यादा दूरी पर बिजाई जरूरी हो गया है क्योंकि ढाई फीट पर बोने के बजाय चार से पांच फीट पर बोने में गन्ने का नुकसान कम होता है। उन्होंने कहा कि अगर किसान अगले साल मशीनों से गन्ने की कटाई करने की सोच रहे हैं, तो उन्हें अभी से गन्ने की बुवाई की प्लानिंग करनी होगी ताकि कटाई के समय कोई दिक्कत न हो। बसंत कालीन गन्ने को लाइन से लाइन 3 से 5 फीट और पौधे से पौधे 1 से 1.5 फीट की दूरी पर, दो लाइन की दूरी पर बोना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ़ पानी की खपत कम होती है, बल्कि इस तरीके से बोया गया गन्ना कम गिरता है और पैदावार भी ज़्यादा होती है। गन्ने की दो लाइनों के बीच कम से कम 3 फीट की दूरी होनी चाहिए। इस दूरी पर छोटे ट्रैक्टर/पावर वीडर से जुताई करके खरपतवार को भी कंट्रोल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर गेहूं की कटाई के बाद गन्ने की बुवाई करनी है, तो गन्ने की पौध तैयार करके बोई जा सकती है। इस मौके पर चीफ गन्ना विकास अधिकारी सुखदीप सिंह ने किसानों से गन्ने का रकबा बढ़ाने की अपील की। इस मौके पर गन्ना किसान मुकेश कुमार, फील्ड स्टाफ और किसान भी मौजूद थे।


