सुरिंदर सिंह | जालंधर जालंधर सिटी और देहात से गुजरने वाले कई नेशनल और स्टेट हाईवे अब लगातार हो रहे सड़क हादसों के कारण बेहद खतरनाक बन चुके हैं। हालात यह हैं कि लगभग हर दूसरे दिन किसी न किसी हाईवे पर सड़क दुर्घटना हो रही है, जबकि हर सप्ताह किसी न किसी परिवार को अपनों की मौत का दर्द झेलना पड़ रहा है। ट्रैफिक विभाग और एडवाइजरी कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो वर्षों में जालंधर के 4 प्रमुख हाईवे पर करीब 2500 सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं। इन हादसों में लगभग 1200 लोग घायल हुए, जबकि 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। लगातार बढ़ रहे हादसों के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से समय पर ठोस कदम नहीं उठाए जाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हाईवे पर बने अवैध कट, सड़क की कम चौड़ाई, स्ट्रीट लाइट्स की कमी, चेतावनी बोर्ड और ब्लिंकर्स का अभाव हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं। कई स्थानों पर वाहन चालकों को यह पता ही नहीं चलता कि आगे खतरनाक मोड़ या क्रॉसिंग है, जिससे अचानक ब्रेक लगने या टक्कर की स्थिति बन जाती है। खास बात यह है कि जिन स्थानों पर सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं, वहां कई जगहों पर चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं, ताकि वाहन चालक पहले से सावधानी बरत सकें। हादसों को कम करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने करीब 96 करोड़ रुपए की योजना तैयार की है। यह बजट जालंधर से दिल्ली की ओर जाने वाले मार्ग, पठानकोट की दिशा, अमृतसर हाईवे और नकोदर रोड पर सुरक्षा सुधार के लिए खर्च किया जाएगा। योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण, अवैध कट बंद करना, स्ट्रीट लाइट्स लगाना, रिफलेक्टिव साइन बोर्ड, स्पीड वार्निंग सिस्टम और ब्लिंकर्स लगाने जैसे कई काम किए जाएंगे। इसके अलावा जहां जरूरत होगी, वहां डिवाइडर मजबूत किए जाएंगे और कुछ जगहों पर यू-टर्न भी व्यवस्थित किए जाएंगे। अब इन हादसों को रोकने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने नया कदम उठाने की तैयारी की है। विभाग की ओर से ऐसे हाईवे का ड्रोन सर्वे कराया जाएगा, जहां सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। ड्रोन की मदद से पूरे मार्ग का हवाई निरीक्षण किया जाएगा और यह देखा जाएगा कि किन-किन स्थानों पर ब्लैक स्पॉट बने हुए हैं। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम यह तय करेगी कि इन खतरनाक स्थानों को कैसे खत्म किया जाए। इस सर्वे के आधार पर एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसी के अनुसार सुधार कार्य किए जाएंगे। लोगों की भी मांग, जल्द हो कार्रवाई : स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि कई बार प्रशासन को हादसों की जानकारी दी गई, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का मानना है कि अगर पहले ही ब्लैक स्पॉट खत्म कर दिए जाते और चेतावनी बोर्ड लगाए जाते तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। अब ड्रोन सर्वे और नई योजना से उम्मीद की जा रही है कि हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और लगातार हो रहे हादसों पर लगाम लग सकेगी। विनोद अग्रवाल, रोड सेफ्टी कमेटी के स्टेट लेवल मेंबर


