भास्कर न्यूज | बलौदाबाजार
शहर स्थित पुराने तहसील कार्यालय में शुक्रवार तड़के सुबह अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला, पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग एसडीओपी कार्यालय की पुरानी बिल्डिंग की ओर से लगी और धीरे-धीरे फैलते हुए तहसीलदार कार्यालय तक पहुंच गई। पुराने भवन की ऊपरी संरचना लकड़ी और खपरैल से बनी होने के कारण आग तेजी से फैलने लगी, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति गंभीर हो गई। आग की लपटें उठती देख आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि यह भवन वर्ष 1905 में निर्मित हुआ था और इसकी संरचना काफी पुरानी थी। दमकल टीम को भवन के कुछ हिस्सों की दीवारें भी तोड़नी पड़ीं, ताकि भीतर तक पहुंचकर आग बुझाई जा सके। आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंच गए। कर्मचारियों ने सबसे पहले कार्यालय के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। राहत की बात यह रही कि अधिकांश जरूरी कागजात समय रहते सुरक्षित निकाल लिए गए। इस घटना में कार्यालय के कुछ कंप्यूटर सिस्टम और अन्य सामान जलकर नष्ट हो गए हैं। एसडीएम ने बताया कि रिकॉर्ड रूम सुरक्षित है और वहां रखे अधिकांश महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चला है। बलौदाबाजार का प्रशासनिक इतिहास काफी पुराना रहा है। वर्ष 1854 से 1864 तक बलौदाबाजार रायपुर जिले का हिस्सा था। इसके बाद 1864 में इसे बिलासपुर जिले में शामिल कर लिया गया। वर्ष 1903 में प्रशासनिक दिक्कतों के कारण सिमगा स्थित तहसील मुख्यालय को बलौदाबाजार स्थानांतरित किया गया।दाऊ कल्याण सिंह ने भाटापारा के विकास और उत्थान के लिए कई प्रयास किए, लेकिन किसी कारणवश उन्होंने भाटापारा में तहसील मुख्यालय के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई। प्रशासनिक दृष्टि से बलौदाबाजार उपयुक्त माना गया और सिमगा से तहसील मुख्यालय को बलौदाबाजार में स्थानांतरित कर दिया गया।


