रसोइया-संयोजिकाओं ने हड़ताल की चेतावनी दी, न्यूनतम वेतन व सुरक्षा सहित कई मांगें रखीं

भास्कर न्यूज |गुमला झारखंड में मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ी रसोइया-संयोजिकाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि कई रसोइया-संयोजिकाएं पिछले 20–21 वर्षों से विद्यालयों में सेवा दे रही हैं, लेकिन 60 वर्ष की उम्र होने का हवाला देकर उन्हें काम से हटाया जा रहा है। इससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस संबंध में मंत्री, अधिकारियों, विधायकों और न्यायालय तक ज्ञापन सौंपा जा चुका है। रसोइया-संयोजिकाओं को उम्मीद है कि सरकार हड़ताल से पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।रसोइया-संयोजिका ओं की मुख्य मांगों में सभी को न्यूनतम वेतन लागू करना, वर्ष 2021 के बाद से नहीं मिले एप्रोन कैप उपलब्ध कराना और साल में दो सेट यूनिफॉर्म देने की मांग शामिल है। इसके अलावा संयोजिका और अध्यक्ष को भी रसोइयों की तरह मानदेय से जोड़ने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि जब तक रसोइयों के लिए स्थायी नियमावली नहीं बनती, तब तक 60 वर्ष की उम्र की बाध्यता समाप्त की जाए। यदि किसी रसोइया को हटाया जाता है तो उसके परिवार के किसी सदस्य को काम देने की व्यवस्था की जाए, ताकि वर्षों से सेवा देने वाले परिवार को आजीविका का सहारा मिल सके। रसोइया-संयोजिकाओं ने काम के दौरान दुर्घटना होने पर समुचित इलाज और मुआवजा देने की भी मांग उठाई है। संगठन के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनोवा प्रखंड के हंडीमारा स्कूल में कार्यरत एक रसोइया की किचन की खिड़की बंद करते समय गिरने से गंभीर चोट लग गई थी और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसी तरह चक्रधरपुर प्रखंड के रोलाडी मध्य विद्यालय में कार्यरत एक अन्य रसोइया की भी मौत हो गई। संगठन ने इन दोनों मामलों में परिजनों को मुआवजा और आश्रितों को नौकरी देने की मांग की है। इसके अलावा काम के दौरान जलने या घायल होने वाली रसोइयों का इलाज विभाग द्वारा कराने और पूर्व में हुए इलाज के खर्च का भुगतान करने की मांग भी रखी गई है। संगठन ने सभी रसोइया संयोजिकाओं को पेंशन योजना, ईपीएफ और ग्रेच्युटी से जोड़ने तथा 10 लाख रुपये का नि:शुल्क बीमा देने की मांग की है। संगठन ने आरोप लगाया कि कई विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन की सामग्री खरीदने की जिम्मेदारी संयोजिका की होने के बावजूद शिक्षक स्वयं बाजार जाकर खरीदारी करते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं कुछ स्थानों पर संयोजिकाओं से कमीशन मांगने और हटाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। रसोइया-संयोजिकाओं ने मध्यान्ह भोजन के लिए मिलने वाली सामग्री की राशि बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि महंगाई को देखते हुए बच्चों के भोजन पर मिलने वाली राशि बढ़ाई जानी चाहिए, साथ ही अंडे के लिए मिलने वाली राशि भी बढ़ाई जाए। संगठन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष अजित प्रजापति, प्रदेश कोषाध्यक्ष अनिता देवी केसरी जिला अध्यछ देवकी देवी सहित अन्य पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की है कि हड़ताल से पहले इन समस्याओं का समाधान किया जाए, ताकि गरीब रसोइया- संयोजिकाओं को न्याय मिल सके।

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