झारखंड पुलिस में जल्द लागू होगा ई-समन सिस्टम, समय व मैनपावर की होगी बचत

झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों और पुलिस इकाइयों को नौ मार्च से ग्रीष्मकालीन वर्दी धारण करने का निर्देश जारी किया है। यह व्यवस्था 15 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, झारखंड पुलिस के सभी पदाधिकारी और जवान 9 मार्च 2026 से 15 नवंबर 2026 तक ग्रीष्मकालीन वर्दी (आस्तीन मुड़ा) टोपी सहित धारण करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले पुलिस मुख्यालय के चार नवंबर 2025 के आदेश के तहत झारखंड पुलिस के जवान और पदाधिकारी 15 नवंबर 2025 से शीतकालीन वर्दी (बंद आस्तीन) टोपी सहित पहन रहे थे। क्राइम रिपोर्टर|रांची झारखंड पुलिस अब संदिग्धों और आरोपियों को मोबाइल या ई-मेल के माध्यम से भी समन भेज सकेगी। इसके लिए राज्य में ई-समन प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस व्यवस्था के लागू होने से समय, कागज और मैनपावर की बचत होगी तथा समन की प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। पुलिस मुख्यालय की ओर से सीसीटीएनएस के नोडल पदाधिकारी सह डीआईजी कार्तिक एस. ने इस संबंध में सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को पत्र जारी कर प्रत्येक जिले में ई-समन एप के लिए नोडल अधिकारी नामित करने का निर्देश दिया है। उनसे आठ मार्च तक नोडल अधिकारियों का विवरण पुलिस मुख्यालय को भेजने को कहा गया है। नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप समन जारी करने से लेकर उसकी तामील तक की प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पूरा करने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली ने ई-समन एप विकसित किया है। यह पूरी प्रक्रिया क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम के माध्यम से संचालित की जाएगी, जिससे पुलिस कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी हो सकेगी। 1. समय की बचत : ई-समन प्रणाली से संदिग्धों और आरोपियों को तुरंत मोबाइल या ई-मेल पर समन भेजा जा सकेगा, जिससे कोर्ट और पुलिस का समय बचेगा। 2. पारदर्शिता : इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समन जारी होने से किसी पक्ष द्वारा प्रक्रिया में हेरफेर या देरी की संभावना कम होगी। 3. कागज व मैनपावर की बचत : अब कागजी समन की जगह डिजिटल समन इस्तेमाल होगा, जिससे प्रशासनिक खर्च और मानव संसाधन की बचत होगी। 4. प्रक्रिया में तेजी : ई-समन एप के माध्यम से समन जारी करने और उसकी तामील की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे न्याय प्रणाली और अधिक प्रभावी बनेगी। 5. पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार : क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम से जुड़ी यह प्रक्रिया अपराधों की जांच और ट्रैकिंग में मदद करेगी, जिससे आम जनता को सुरक्षित माहौल मिलेगा।

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