सबसे पहले मेनोपॉज को ना समझने के गंभीर परिणाम दिखाती दो कहानी पढ़िए… भरतपुर की 25 वर्षीय कजरी (बदला नाम) की घर में ही दो डिलीवरी हुईं। उसे पेल्विक इंफेक्शन हो गया। कैंसर के डर से उसने यूटरस के साथ ओवरी भी निकलवा दी। इससे हारमोन का स्तर गिर गया। थकावट, कमजोरी और डिप्रेशन हुआ। पति-परिवार ने ‘पागलपन’ बोलकर उसे छोड़ दिया। दौसा की 42 वर्षीय गेंदी देवी को हाथ-पैरों और कमर में तेज दर्द था। मेनोपॉज के बाद दूसरे ही साल में हडि्डयां इतनी कमजोर हो गईं कि 10 महीने में 4 फ्रैक्चर हो गए। काम-मजदूरी मिलना भी बंद हो गई। … ये सिर्फ कजरी और गेंदी देवी की बात नहीं, राजस्थान की हजारों महिलाओं का दर्द है जो कुदरती और ‘सर्जिकल मेनोपॉज’ के कारण समय से पहले बूढ़ी और बीमार हो रही हैं। एनएफएचएस-5 के आंकड़े हैं- प्रदेश में महिलाओं में 44-45 की उम्र की 19%, 46-47 की 25% और 48-49 उम्र की 41% महिलाएं मेनोपॉज से गुजर रही हैं। पेल्विक इंफेक्शन के डर से यूटरस निकलवाने वाली 25-30 साल की युवतियां भी रजोनिवृत्त हो चुकी हैं। मेनोपॉज में हारमोन अचानक कम होते हैं, मूड स्विंग और इमोशनल ट्रोमा के साथ कई रोग लगते हैं हडि्डयां चटखती हैं
मेनोपॉज के बाद हर साल 3-4% की दर से हडि्डियां कमजोर होती हैं। 2 से 3 साल में बोन मास का 10% से 15% हिस्सा कम हो जाता है। मेनोपॉज 30 साल की उम्र में आता है तो 50 साल की उम्र तक हिप, कलाई या रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर होने लगता है। मेनोपॉज में गर्मी घातक
येल यूनिवर्सिटी व हावर्ड की रिसर्च है- मेनोपॉज के दौरान गर्मी घातक है। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. शैलेष लोढ़ा बताते हैं- मेनोपॉज में महिलाएं 0.01-0.02 डिग्री ताप बदलाव को भी महसूस करती हैं। 54% महिलाएं एनीमिक भी हैं, 25% में बीपी हाई रहता है। तलाक तक हो रहे हैं
फैमिली कोर्ट में अधिवक्ता सुनील शर्मा के अनुसार- मेनोपॉज में महिलाएं भावनात्मक रूप से बहुत कच्ची होती हैं, पति-परिवार से जुड़ाव की कमी खलती है। पत्नी की दिक्कतों को पति मूड स्विंग मानकर हल्के में लेते हैं। यह इमोशल गैप तलाक की वजह बनता है। मेनोपॉज क्लिनिक क्यों जरूरी?


