चैनपुर में 6 अवैध बांग्ला ईंट भट्ठा चल रहा, चिमनी के धुएं से फैल रहा प्रदूषण

​भास्कर न्यूज|गुमला/चैनपुर गुमला जिले का चैनपुर प्रखंड इन दिनों अवैध ईंट कारोबारियों और खनन माफियाओं की सुरक्षित चारागाह बन गया है। उपायुक्त के सख्त निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) 1986 को ठेंगा दिखाते हुए क्षेत्र में छह अवैध बांग्ला ईंट भट्ठे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकारी गाइडलाइन्स की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पारंपरिक मिट्टी के ईंट भट्ठों को बंद कर फ्लाई ऐश, स्टोन डस्ट और सीमेंट से निर्मित ईंटों को बढ़ावा दिया जाए। यहां तक कि सरकारी निर्माण कार्यों में भी इन वैकल्पिक ईंटों का उपयोग अनिवार्य किया गया है। वहीं इन ईंट भट्ठों में चोरी के कोयले का प्रयोग किया धड़ल्ले से किया जा रहा है। बावजूद इसके, चैनपुर में कुछ सफेदपोश माफिया अधिकारियों की कथित मौन सहमति से अवैध खनन और भट्ठा संचालन के खेल में जुटे हैं। सूत्रों का दावा है कि विभागीय अनदेखी ही इन माफियाओं का सबसे बड़ा संबल है। वहीं कोयजा कैसे और कह​ां से मिल रहा है। ​प्रखंड के विभिन्न इलाकों में नियम-कानून को ताक पर रखकर भट्ठों का संचालन हो रहा है। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ​बेंदोरा पंचायत: छतरपुर ग्राम के दाहिने ओर बम्हनी जाने वाले मार्ग पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण जारी है। ​कतिंग पंचायत: सेमला बरटोली ग्राम में माफिया सक्रिय हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ​लंगड़ा मोड़ व कटकही: इस क्षेत्र के इर्द-गिर्द धड़ल्ले से ईंटें पाथी जा रही हैं और चिमनियों से जहरीला धुआं निकल रहा है। ग्रामीणों की जमीन बंजर हो रही है। उपज प्रभावित हो रही। सांस की बीमारी बढ़ रही। ​कुरुमगढ़: यहां भी अवैध कार्यों का जाल फैला हुआ है, जिस पर अब तक प्रशासन ने लगाम नहीं कसी है। ​इन अवैध गतिविधियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा प्रकृति संरक्षण की बातें सिर्फ कागजों और भाषणों तक सीमित रह गई हैं। चैनपुर अनुमंडल में माफिया इस कदर हावी हैं कि अवैध भट्ठा, बालू और पत्थर का उठाव चरम पर है। ​उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन का दोहरा चरित्र जनता के सामने उजागर हो चुका है। अगर कोई गरीब अपनी छोटी-मोटी जरूरत के लिए कोई काम करे, तो प्रशासन तुरंत डंडा लेकर पहुँच जाता है। लेकिन जब बड़े माफिया सरेआम संसाधनों की लूट मचाते हैं, तो अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं। ​जिला परिषद सदस्य ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अविलंब इन अवैध भट्ठों पर कार्रवाई नहीं की और इन्हें बंद नहीं कराया, तो इस गंभीर मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर बड़े स्तर पर जनांदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। मुख्य उल्लंघन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 एवं उपायुक्त के आदेश की अवहेलना। प्रभावित क्षेत्र: बेंदोरा, कतिंग, लंगड़ा मोड़, कटकही और कुरुमगढ़। प्रशासनिक विफलता: फ्लाई ऐश ईंटों को बढ़ावा देने के निर्देश के बावजूद मिट्टी के भट्ठों पर रोक नहीं।

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