उदयपुर में नगर निगम ने शनिवार सुबह बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। शहर के अलग-अलग व्यापारिक इलाकों में निगम की दो टीमों ने एक साथ दबिश दी और 11 बड़ी कमर्शियल संपत्तियों को सीज कर दिया। निगम की इस अचानक हुई सख्ती से पूरे शहर के व्यापारियों और करदाताओं में हड़कंप मच गया। इन सभी संपत्तियों पर लंबे समय से करीब 65 से 70 लाख रुपए का यूडी टैक्स बकाया चल रहा था। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के सख्त निर्देश पर यह पूरी योजना बनाई गई थी। निगम का प्लान बेहद गोपनीय था, ताकि दुकानदारों को इसकी भनक न लगे। यही वजह रही कि टीमें सुबह 7 बजे ही दुकानों के खुलने से पहले ही मौके पर पहुंच गईं। कार्रवाई के दौरान सभी 11 संपत्तियों के मुख्य द्वारों को सीज कर उनके बाहर सरकारी नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं। अब ये दुकानें अगले आदेश या टैक्स जमा होने तक बंद रहेंगी। शहर के व्यस्ततम बापू बाजार में निगम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां एक साथ 5 दुकानों पर निगम का ताला लटका। इसके अलावा नेहरू बाजार में बैग्ल्ंस कंपनी के बड़े शोरूम को भी सीज किया गया है। निगम की टीम ने अश्विनी बाजार, सेक्टर 3, बीएसएनएल रोड और सेक्टर 9 में भी एक-एक दुकान को सीज किया। वहीं सेक्टर 11 में भी निगम की टीम ने सख्ती दिखाते हुए भीमसिंह चुंडावत के जीकेबी सुपर मार्केट पर बड़ी कार्रवाई की है।
इस पूरी फील्ड कार्रवाई को दो अलग-अलग टीमों ने लीड किया। पहली टीम का नेतृत्व रेवेन्यू इंस्पेक्टर विजय जैन कर रहे थे, जिन्होंने होमगार्ड के जवानों के साथ बापू बाजार और अश्विनी बाजार सहित सात संपत्तियों पर दबिश दी। दूसरी टीम में रेवेन्यू इंस्पेक्टर मोहित और निगम के उड़न दस्ते के जवान शामिल थे, जिन्होंने हिरण मगरी और आसपास के क्षेत्रों में टैक्स डिफॉल्टर्स के खिलाफ मोर्चा संभाला। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि शहर के विकास के लिए यूडी टैक्स का समय पर जमा होना बेहद जरूरी है। हमने उन सभी कमर्शियल प्रॉपर्टी मालिकों को बार-बार नोटिस जारी किए थे, जिनका टैक्स लंबे समय से बकाया था। कई बार रिमाइंडर देने के बाद भी जब उन्होंने टैक्स जमा कराने में रुचि नहीं दिखाई, तो नियम अनुसार यह कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी। खन्ना ने कहा कि निगम का यह अभियान आगे भी चलता रहेगा, जो भी संपत्ति मालिक बार-बार नोटिस के बाद भी टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं, उनकी संपत्तियों को भी आने वाले दिनों में इसी तरह सीज किया जाएगा। उन्होंने टैक्स जमा नहीं करवाने वाले व्यापारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई या अपनी दुकान-शोरूम सीज होने की स्थिति से बचने के लिए जल्द से जल्द अपना बकाया टैक्स जमा करवाएं। निगम की इस कार्रवाई के बाद अब अन्य बड़े डिफॉल्टर्स में भी हड़कंप मच गया।


