आरयूएचएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने शुक्रवार को उदयपुर निवासी तीन साल की बच्ची सनाया के कान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्मार्ट कॉक्लियर इंप्लांट लगाया। करीब तीन घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद बच्ची स्वस्थ है। डॉक्टरों के अनुसार अगले 21 दिन बाद वह सुनने के साथ बोल भी सकेगी। आरयूएचएस के ईएनटी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि सरकारी स्तर पर प्रदेश में इस तरह का यह पहला आधुनिक कॉक्लियर इंप्लांट है। दिमागी बुखार के बाद सुनने की क्षमता पूरी तरह प्रभावित
बच्ची को जन्म से पूरी तरह सुनने की समस्या नहीं थी। परिवार के अनुसार घर में भजन होने पर उसे आवाज का आभास हो जाता था। दो साल की उम्र के बाद अचानक सुनाई देना बंद हो गया। डॉक्टरों के अनुसार दिमागी बुखार के बाद सुनने की क्षमता पूरी तरह प्रभावित हो गई। इसके बाद बच्ची का कॉक्लियर इंप्लांट किया गया। 1000 बच्चों में 4 को पड़ती कॉक्लियर इंप्लांट की जरूरत
हर 1000 जन्म लेने वाले बच्चों में से 4 बच्चों को कॉक्लियर इंप्लांट की जरूरत पड़ती है। राजस्थान में हर साल करीब 200 से 250 कॉक्लियर इंप्लांट किए जाते हैं। जयपुर में आरयूएचएस, एसएमएस और जयपुरिया अस्पताल में यह ऑपरेशन हो रहे हैं। 8 से 22 लाख की लागत;
एडवांस कॉक्लियर इंप्लांट की कीमत 8 लाख से 22 लाख तक होती है। निजी अस्पतालों में यह ऑपरेशन 10 लाख से 25 लाख के बीच पड़ सकता है। डिवाइस की लाइफ स्मार्ट कॉक्लियर इंप्लांट: मरीज का डेटा व मैपिंग सुरक्षित रहेगी इंप्लांट में स्मार्ट नेव तकनीक है, जो सर्जरी के दौरान सही पोजिशन बताती है, जिससे ऑपरेशन अधिक सटीक और सुरक्षित होता है। इसमें इनबिल्ट मेमोरी है, जिसमें मरीज की मैपिंग और डेटा सुरक्षित रखा जा सकता है। तकनीक फर्मवेयर अपग्रेडेबल है, यानी स्मार्टफोन की तरह समय-समय पर अपडेट किया जा सकेगा।


