अलवर के जिला अस्पताल के आईएमए हॉल में शनिवार को आयोजित रामाश्रय जांच शिविर में सिर्फ 8 मरीज ही पहुंचे। शिविर में पांच डॉक्टर खाली बैठे रहे, अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालात यह रहे कि जिन वरिष्ठ नागरिक मरीजों को ओपीडी की बजाय आईएमए हॉल में डॉक्टरों को दिखाना था, वे ओपीडी में ही इलाज करवाकर लौट गए। कई मरीज अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग डॉक्टरों के पास भटकते रहे। अस्पताल प्रशासन ने एक दिन पहले ही आदेश जारी कर पांच डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई थी, जिससे कि 60 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों को एक ही स्थान पर विभिन्न बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श मिल सके। इसके लिए ट्रॉमा सेंटर की पर्ची खिड़की से वरिष्ठ नागरिकों की पर्ची काटकर सीधे कैंप में भेजने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद व्यवस्था सही तरीके से लागू नहीं हो सकी। जानकारी के लिए नहीं लगाए बोर्ड ओपीडी में पहुंचे कई वरिष्ठ नागरिकों को कैंप की जानकारी नहीं दी गई और वे सामान्य ओपीडी में ही इलाज कराकर चले गए। पर्ची काउंटर पर भी कैंप को लेकर पर्याप्त जानकारी या बोर्ड नहीं लगाए गए, जिससे मरीजों को शिविर का लाभ नहीं मिल पाया। डॉक्टर मरीजों का इंतजार करते रहे हालात यह रहे कि आईएमए हॉल में पांच वरिष्ठ डॉक्टर मरीजों का इंतजार करते रहे। प्रशासन के आदेश के अनुसार करीब 125 मरीजों को कैंप में दिखाया जाना था, लेकिन दोपहर एक बजे तक केवल 8 मरीज ही शिविर में पहुंच पाए। यह कैंप दोपहर तीन बजे तक चला। अस्पताल प्रशासन की ओर से शिविर में मरीजों के लिए डॉक्टर, दवा और फल समेत अन्य व्यवस्थाएं भी की गई थीं। कैंप के नोडल अधिकारी डॉ. अमित मित्तल ने बताया कि शिविर में पांच डॉक्टर मौजूद रहे, लेकिन दोपहर तक केवल 8 मरीज ही पहुंच पाए।


