भास्कर न्यूज| महासमुंद महासमुंद नगर के पुराना विश्राम गृह में भारतीय सांस्कृतिक निधि के तत्वावधान में गुरुवार को विश्व वन्य जीव दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी ने वन्य जीवों की संरक्षण और घटती जनसंख्या विषय पर चर्चा की गई। संगोष्ठी के अवसर पर राज्य अध्याय के संयोजक अरविन्द मिश्रा ने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक निधि के क्षेत्र में कार्य करने के लिए अपार संभावनाएं है। यहां के कर्मठ कार्यकर्ता गण अत्यंत सक्रिय है। समूचे छग में महासमुंद का एक अलग पहचान है। रायपुर अध्याय के संयोजक प्रो. आरके तिवारी ने कहा कि वन्य जीवों का संरक्षण हम सबका दायित्व है। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक कर जीवों के प्रति कर्तव्यों से अवगत कराया गया। उन्होंने अनेक कविताओं व लोककथाओं के माध्यम से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। महासमुंद अध्याय से दाऊलाल चंद्राकर ने इंटेक के क्षेत्र में किये गये कार्यों का विवरण देते हुए वन्य जीवों की संरक्षण व घटते संख्या पर चिंता व्यक्त की गई। वन्य जीवों के बचाव के लिए करने वाले कार्यों के बारे में बताया गया। इस मौके पर बंधु राजेश्वर खरे, दाऊलाल चंद्राकर ने राज्य संयोजक को आश्वस्त करते हुये कहा कि महासमुंद आगामी समय में विस्तृत कार्य योजना के साथ इस क्षेत्र में अग्रसर होगा। समाज सेवी दाऊलाल चंद्राकर के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के संयोजक अरविन्द मिश्रा व रायपुर अध्याय के संयोजक प्रो. आरके तिवारी मौजूद थे। साहित्यकारों ने साहित्य के माध्यम से दी जानकारी इस अवसर पर साहित्यकार अशोक शर्मा ने अपनी कविता खतरे में जंगल है, सिर्फ दुआ संबल है बरगद है गमलों में फोटो में जंगल है, रेंजर के मौज मजे जंगल में मंगल है कविता सुनाकर कार्यक्रम को नई ऊंचाइयां दी। साहित्यकार एस. चंद्रसेन ने कहा कि धरती ने कहा यूं अम्बर से रंग तेरा क्यों उखड़ा है, कल तक जो दमक रहा था, आज उजड़ता मुखड़ा है। अध्याय के सह संयोजक बंधु राजेश्वर खरे ने अपनी रचना बंदर न आना तुमगांव में सुनाते हुये वन्य जीव संरक्षण पर अनेक रोचक जानकारियां दी। संगोष्ठी के दौरान माधवराव टांकसाले, मानक चंद्राकर, डॉ. रामगोपाल यादव, प्रमोद तिवारी, शकील लोहानी ने विचार व्यक्त करते हुये भारतीय सांस्कृतिक निधि व विश्व वन्य जीव दिवस पर रोचक जानकारियां दी गई।


