झालावाड़ में फार्मासिस्ट संघर्ष समिति ने मिनी सचिवालय में विरोध प्रदर्शन कर स्वास्थ्य मंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। फार्मासिस्टों ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने नए पदों की स्वीकृति और भर्ती मेरिट व बोनस अंकों के आधार पर की जाए। समिति ने बताया कि मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना में राजस्थान पूरे देश में अव्वल है। यह योजना 2011 से फार्मासिस्टों के माध्यम से सफलतापूर्वक चल रही है। फिर भी फार्मासिस्टों की मांगें अनसुनी हैं। फॉर्मेसी एक्ट-1948 के अनुसार बिना फार्मासिस्ट की उपस्थिति में दवा वितरण नहीं किया जा सकता है, लेकिन नियम के विपरीत अन्य कर्मचारी दवाएं बांट रहे हैं। 50 बेड के अस्पताल में रोजाना 300-400 मरीजों की ओपीडी होती है। वहां 11 डॉक्टर, 15 नर्सिंग अधिकारी, 5 लैब कर्मचारी और 8 वार्ड बॉय हैं, लेकिन फार्मासिस्ट का केवल एक पद स्वीकृत है। इससे मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। कई मरीज बिना दवा लिए लौट जाते हैं। फार्मासिस्टों ने मांग की है कि प्रति 100 मरीजों पर एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति की जाए। साथ ही नए पदों की स्वीकृति और भर्ती मेरिट व बोनस अंकों के आधार पर की जाए। ज्ञापन देने वालों में लोकेश धाकड़, नितिन लाट, अशोक नागर, पवन लोधा, रामबिलास, दुष्यंत शर्मा, आयुष राठौर, चेतन वैष्णव और सावलिया राठौर शामिल थे।


