भाषा संस्कृति, लिपि और धर्म से ही आदिवासियों की पहचान है: महाबीर

भास्कर न्यूज | धालभूमगढ़ धालभूमगढ़ प्रखंड क्षेत्र के रावताड़ा पंचायत के गुड़गाई कोचा गांव के आदिवासी जियाड़ झरना गुड़गाई कोचा की ओर से बाहा पर्व (सरहुल) बोंगा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम सिंगाड़ लंगड़े तुम्दा टामाक नृत्य कार्यक्रम में दिशोम गुरुजी के सपने फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक सह झामुमो नेता महाबीर मुर्मू उपस्थित हुए। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिए प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया। जिसमें प्रथम पुरस्कार अलमीरा विजेता पारो हेम्ब्रम गांव धोबनी जादूगोड़ा, द्वितीय पुरस्कार अलमीरा विजेता मालती हेम्ब्रम गांव धोबनी डुमरिया, तृतीय पुरस्कार ड्रेसिंग टेबल विजेता रानी मुर्मू गांव पिठाती, चतुर्थ पुरस्कार ड्रेसिंग टेबल विजेता सलमा टुडू गांव खरस्वती, पांचवां पुरस्कार ड्रेसिंग टेबल विजेता मालती मुर्मू गांव सारजामदा परसुडीह को पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर महाबीर मुर्मू ने बताया आदिवासी समाज को भाषा, संस्कृति को बचाने की जरूरत है। भाषा संस्कृति से आदिवासियों की पहचान है। आदिवासी समाज में शिक्षा की कमी है, कैसे हमारा समाज शिक्षा की ओर आगे बढ़ेगा इस को लेकर भी चिंतन मंथन करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि हमारे बच्चे आगे बढ़ेंगे, अच्छे पद पर जाएंगे तो निश्चित ही परिवार के साथ-साथ गांव व समाज आगे बढ़ेगा। मौके पर मुखिया अर्जुन मांर्डी, माझी बाबा दामोदर मुर्मू, फागू सोरेन, कालिदास बास्के, विक्रम हेम्ब्रम, सुबोध मुर्मू, शरबत मुर्मू, दुर्गा प्रसाद हांसदा आदी उपस्थित थे।

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