विधानसभा में अनुदान मांगों की बहस के दौरान दो पूर्व यूडीएच मंत्री में जमकर नोंक झोक हुई। पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने शांति धारीवाल पर आरोप लगाए। जिसका जवाब देते हुए शांति धारीवाल ने कहा कि कोटा में चंबल रिवर फ्रंट व सिटी पार्क प्रदेश का ही नहीं देश का एसेट है। अगर कोई गड़बड़ी है तो सिर्फ कहने से काम नहीं चलता की ‘भ्रष्टाचार कर, दिया भ्रष्टाचार कर दिया’। लिखो, लिखकर के शिकायत करो, और जांच करवाओ। धारीवाल ने कहा कि बेईमानी की है तो हमें पकड़ो। एनजीटी की परमिशन की कही कोई जरूरत नहीं थी। एनजीटी की बात आप ने की। एनजीटी का कानून मालूम है आपको। 20 हजार स्क्वायर यार्ड कवर्ड एरिया से ज्यादा होता है तब एनजीटी की परमिशन ली जाती है वरना परमिशन नही ली जाती। कुछ लोग हमारे खिलाफ एनजीटी में गए और शिकायत की तो एनजीटी ने अपनी टीम भेजी। टेक्निकल एक्सपर्ट सहित अन्य इन्वेस्टिगेटर आए। उसमे राजस्थान सरकार के अफसर भी शामिल रहे। टीम ने तीन दिन जांच करके रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में कहा कि इतनी बेहतरीन चीज बनाई है,और नियमों से बनाई गई है। रहा सवाल मुख्यमंत्री का तो उस दिन वें बीमार थे और दूसरे दिन आ गए तो मैं क्या आपको बुलाता क्या? दरअसल श्रीचंद्र कृपलानी ने कहा था कि कोटा में चंबल रिवर फ्रंट 1442 करोड में बनवाया गया। एनजीटी से परमिशन लिए बिना बनाया। सबसा बड़ा आश्चर्य है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इन्होंने परियोजना के उद्घाटन के लिए बुलाया तो लोगों की शिकायत के बाद गहलोत जी ने आने से मना कर दिया। हर महीने 2 करोड़ का चारा खा रहा 1500 करोड़ का सफेद हाथी-संदीप शर्मा अनुदान की मांगों पर बोलते हुए विधायक संदीप शर्मा ने कांग्रेस के समय धारीवाल द्वारा बेतरतीब विकास एवं जनता के पैसे की बर्बादी का आरोप लगाते हुए कहा कि आपका विकास केवल कंक्रीट के जंगल खड़े करने तक ही सीमित रहा। आपने विकास का आर्थिक, धार्मिक, सामाजिक, नैतिक पक्ष नहीं देखा। उन्होंने धारीवाल पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि यूं तो मंत्री जी पूरे राजस्थान के थे लेकिन कोटा पर उनकी विशेष कृपा थी। गड़बड़ी यह रहीं कि उनका मन थोड़ा संकीर्ण हो गया और विकास सिर्फ उनकी विधानसभा पर ही अटक गया। विकास पुरूष का सिर,धड़,हाथ, पैर सब कोटा उत्तर में ही रहा इसके बाहर नहीं निकल पाया। रिवर फ्रंट निर्माण में पैसे की बर्बादी और प्राचीन स्थानों को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए विधायक शर्मा ने कहा कि आपने 1500 करोड़ का सफेद हाथी खड़ा कर दिया जो 2 करोड़ रूपए महीने का चारा खा रहा है। आपने आईएल की आधी जमीन बेच दी, आधे में ऑक्सीजोन बना दिया। जबकि यहां मिनी सचिवालय बनाते तो पूरे कोटा सम्भाग को लाभ मिलता। मिनी सचिवालय निर्माण के लिए मैंने सदन में याचिका लगाई थी, पर नियमों को ताक पर रखकर आप उसे भी टालते रहे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि धारीवाल जी ने पूरे 5 साल कोटा दक्षिण विधानसभा में भूमि मंथन करते रहे, सारी खाली जमीनों, नालों पर प्लॉट बेच दिये लेकिन इस भूमि मंथन से जो अमृत निकला वो सारा ही कोटा उत्तर पी गया। कोटा दक्षिण के लोग तो मूल आवश्यकताओं के लिए भी तरसते रहे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि चम्बल नदी की अपस्ट्रीम पर चम्बल गार्डन, भीतरिया कुण्ड, गोदावरी धाम और मौजी बाबा की गुफा जैसे धार्मिक व प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के विकास, दशहरे मैदान के द्वितीय चरण के कार्य, शहर के नालों का द्रव्यवती नदी की तर्ज पर सौंदर्यीकरण, कोटा शहर में एक्सीडेंट ब्लैंक स्पॉट में सुधार, गौशाला के विस्तार, पार्कों और मुक्तिधामों के विकास, शहर के फुटपाथों को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकास, वेण्डिंग जोन निर्माण करवाया जाए।


