गुरमीत लूथरा | अमृतसर पंजाब सरकार द्वारा बिजली टैरिफ में की गई कटौती का उद्योगपतियों ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही इसे नाकाफी बताते हुए और अधिक कटौती की मांग की है। फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव चरणजीत शर्मा ने कहा कि सरकार को मौजूदा टैरिफ पर पुनर्विचार करना चाहिए और 70 पैसे के बजाय डेढ़ रुपए प्रति यूनिट की राहत देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी वर्ष में सरकार को उद्योगपतियों को अधिक से अधिक राहत देनी चाहिए थी।
फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के चीफ पैट्रन कमल डालमिया ने कटौती का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच चल रहे युद्ध और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावनाओं के बीच यह राहत एक सकारात्मक कदम है। सरकार के बढ़ते खर्चों और कम आमदनी के मद्देनजर यह राहत स्वागत योग्य है। भारतीय व्यापार मंडल के प्रदेश प्रधान राजीव अनेजा ने टैरिफ में कटौती को नाकाफी करार देते हुए दो रुपए प्रति यूनिट राहत की मांग की है। उन्होंने कहा कि 70 पैसे की राहत से उद्योगपतियों को विशेष लाभ नहीं होगा। यदि सरकार बड़ी कटौती करती है, तो निर्माण लागत कम होगी, जिससे ग्राहकों को भी सस्ता सामान उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी पिछले चार वर्षों से 5 रुपए प्रति यूनिट कटौती की मांग कर रहे थे। लघु उद्योग भारती के महासचिव समीर खन्ना ने कहा कि सरकार को प्रति यूनिट एक रुपए की कटौती करनी चाहिए थी, जिससे व्यापार और अधिक फलता-फूलता। उन्होंने कहा कि टैक्स की वृद्धि और महंगी बिजली के कारण प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयां नहीं लग पा रही हैं। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र अमृतसर के लिए और अधिक सुविधाओं व रियायतों की मांग की। अखिल भारतीय उद्योग मंडल के राष्ट्रीय उपप्रधान रंजन अग्रवाल ने कहा कि इंडस्ट्री को न्यूनतम एक रुपया प्रति यूनिट की राहत दी जानी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि अभी भी जम्मू-कश्मीर में बिजली 4 रुपये और हिमाचल प्रदेश में करीब 3.80 रुपए प्रति यूनिट मिल रही है, जबकि पंजाब में यह अभी भी करीब 9.50 रुपए प्रति यूनिट है। बिजली महंगी होने के कारण पंजाब से उद्योगों का पलायन जारी है।


