सतीश कपूर | अमृतसर अगर कोई व्यक्ति अपने मन में काम करने की ठान ले तो निश्चय ही वह पूरा हो जाता है। उसमें उम्र कोई मायने नहीं रखती। कुछ इसी तरह का जोश रणजीत एवेन्यू गुरुद्वारा श्री सर्ब साझी गुरबाणी के 67 वर्षीय प्रधान मंगल सिंह का है जो विश्व शांति की अरदास करने गुरु नगरी से श्री हजूर साहिब साइकिल पर रवाना हो गए। गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी बलविंदर सिंह, सरबजीत सिंह, राजू समेत अन्य लोगों ने मिलकर मंगल सिंह की यात्रा के लिए वाहेगुरु के चरणों में अरदास की। इसके बाद मंगल सिंह साइकिल पर सवार होकर लोहारका रोड स्थित गुरुद्वारा संगत साहिब से श्री हजूर साहिब के दर्शनों को रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि हजूर साहिब में माथा टेकने के बाद वह 200 किलोमीटर आगे कर्नाटक के गांव नानक जोश के गुरुद्वारा साहिब में भी माथा टेकेंगे। मंगल सिंह का कहना है कि एक तरफ की 2200 किलोमीटर की साइकिल यात्रा होगी और दोनों तरफ से 4200 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने को 2 महीने का समय लगेगा। पहले भी तीन बार साइकिल से यात्रा कर चुके हैं: 67 साल के मंगल सिंह के मुताबिक इससे पहले वह तीन बार साइकिल से श्री हजूर साहिब की यात्रा कर चुके हैं। उनका कहना है कि यात्रा से पहले साइकिल की रिपेयर करवाई जाती है। वहीं यात्रा दौरान अपने साथ थोड़ा सा सामान लेकर जाते हैं। एक दिन में वह साइकिल से करीब 120 किलोमीटर की यात्रा तय कर लेते हैं पर पहाड़ी इलाके में केबल 90 किलोमीटर तक यात्रा हो पाती है। मंगल सिंह के अनुसार रात को किसी गांव के गुरुद्व्रारा साहिब में लंगर खाकर वाहेगुरु का सिमरन करके विश्राम किया जाता है। उनके साइकिल चलाने के जोश को देखकर राहगीर भी हैरान हो जाते है। गुरु नगरी से चलकर मंगल सिंह हरियाणा के पलवल गांव में पहुंचे है। उनका कहना है कि इस साइकिल यात्रा दौरान वह वाहेगुरु नाम सिमरन से लोगों को भी जोड़ते हैं।


