राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षिकाएं अपनी शिक्षा से रच रही इतिहास

बोकारो | अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि उन महिलाओं को याद करने का दिन है, जिन्होंने अपने कार्य और समर्पण से समाज को नई दिशा दी है। शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत ऐसी ही तीन प्रेरक शिक्षिकाएं डॉ. हेमलता एस मोहन, डॉ. निरुपमा कुमारी और आशा रानी हैं, जिन्हें उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। शिक्षिकाओं ने शिक्षा के प्रति समर्पण, निरंतर शोध और समाज के प्रति जिम्मेदारी ने उन्हें न केवल सम्मान दिलाया है, बल्कि वे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी बनी हैं। महत्वपूर्ण योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुई डॉ. निरुपमा डॉ. निरुपमा कुमारी हिंदी विषय की अनुभवी शिक्षिका है, जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। लगभग 18 वर्षों के शिक्षण अनुभव के साथ उन्होंने पाठ्यक्रम विकास, पाठ्यपुस्तक लेखन और शैक्षणिक प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीआरटी) के साथ मिलकर विभिन्न पुस्तकों, प्रश्न बैंकों और शिक्षक पुस्तिकाओं के निर्माण में योगदान दिया है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त करने वाली डॉ. निरुपमा शिक्षा में नवाचार और शोध आधारित शिक्षण की पक्षधर हैं। पूर्व राष्ट्रपति के हाथों डॉ. हेमलता एस. मोहन को मिला है सम्मान डीपीएस बोकारो की पूर्व प्राचार्या सह डीपीएस चास की चीफ मेंटर डॉ. हेमलता एस. मोहन शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों में गिनी जाती हैं। वर्ष 2004 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया, जबकि 2002 में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने उन्हें सीबीएसई टीचर अवार्ड प्रदान किया। वह 2010 से 2013 तक झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष भी रहीं। शिक्षा को संस्कृति से जोड़ने की उनकी सोच और ‘जॉय ऑफ गिविंग’ जैसी अवधारणा से सकारात्मक संदेश दिया। संस्कृत विषय को रोचक व प्रभावी बना रही शिक्षिका डॉ. आशा रानी संस्कृत विषय की शिक्षिका डॉ. आशा रानी ने अपने अभिनव शिक्षण कार्यों और शोध गतिविधियों से शिक्षा जगत में विशेष पहचान बनाई है। उन्हें वर्ष 2024 में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की ओर से राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संस्कृत शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने कई नवाचारी प्रयोग किए तथा विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें, प्रश्न बैंक और मॉड्यूल तैयार किए। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में शोध पत्र प्रस्तुत करने के साथ-साथ वे राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर और संसाधन व्यक्ति के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। उनके प्रयासों ने संस्कृत को नई ऊर्जा दी है। हजारों महिलाओं को साक्षर कर चुकी हैं दांतू कसमार की मालती कसमार के दांतू गांव निवासी विवेकानंद नायक की प|ी मालती ने वर्ष 2000 में सामाजिक क्षेत्र में उन दिनों कदम रखा, जब बोकारो के तत्कालीन डीसी विमल कीर्ति सिंह के नेतृत्व में साक्षरता अभियान ने जोर पकड़ा था। महिला नेतृत्व के बिना इस अभियान को सफल बनाना संभव नहीं था। इसी परिस्थिति में मालती नायक अपने पति की प्रेरणा से घर की देहरी लांघकर बाहर निकली और साक्षरता अभियान से जुड़कर महत्वपूर्ण हिस्सा बनी। मालती ने अभियान को सफल बनाने के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित कर दिया और प्रखंड की हजारों महिलाओं को साक्षर बनाया।

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