जिला प्रशासन के आदेशानुसार 25 फरवरी तक पुस्तकों की सूची सार्वजनिक करनी थी, परंतु हर बार की तरह इस बार भी शहर के कुछ निजी विद्यालय जैसे कि चिन्मया, अय्यप्पा, डीपीएस, एमजीएम, जीजीपीएस, पेंटिकॉस्टल आदि पर जिला प्रशासन के आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने नए सत्र में इस्तेमाल होने वाले पुस्तकों की सूची सार्वजनिक नहीं की है। बताते चलें कि 11 फरवरी को हुई बैठक की कार्रवाई में बोकारो डीसी ने पुस्तकों की सूची 25 फरवरी तक सार्वजनिक कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपी थी। जबकि शिक्षा पदाधिकारी जगरनाथ लोहरा ने डीसी के निर्देश पर 7 फरवरी को ही शहर के 25 स्कूलों को अपने कार्यालय के ज्ञापांक 193 दिनांक 7 फरवरी 2026 के माध्यम से पुस्तकों की सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। लेकिन अब तक कुछ स्कूलों की बात छोड़ दें तो कई बड़े स्कूलों ने अब तक पुस्तकों की सूची सार्वजनिक नहीं किया है। इस प्रकार कई स्कूलों की ओर से आदेश की अवहेलना की गई है। इससे अभिभावक भी ठगा महसूस कर रहे हैं। जिला प्रशासन मनमानी रोकने में असमर्थ दिख रहा है: नीरज झारखंड अभिभावक महासंघ के जिलाध्यक्ष नीरज पटेल ने बताया कि इस साल महासंघ कठिन और लगातार प्रयास से जिला प्रशासन से 25 फरवरी तक पुस्तकों की सूची सार्वजनिक करवाने का आदेश निकलवाने में कामयाब हुआ। मगर जिला प्रशासन इनकी मनमानी रोकने और आदेश का पालन करवाने में साफ तौर पर असमर्थ दिख रहा है। नए सत्र के पुस्तकों की सूची सार्वजनिक नहीं करने वाले विद्यालयों पर क्या कार्रवाई होगी? यह तो बोकारो डीसी ही बता सकते हैं। अगर अब प्रशासन के दबाव में पुस्तकों की सूची जारी भी की जाती है, तो इसका लाभ अभिभावकों को नहीं मिल सकेगा। अगर सूची नहीं देते हैं, तो विधि सम्मत कार्रवाई होगी :डीडीसी 25 फरवरी तक सूची सार्वजनिक करने का डीसी ने दिया था निर्देश शहर के कई पुस्तक विक्रेताओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नए सत्र का पुस्तक विक्रय स्कूल का रिजल्ट निकलने के दिन से शुरू होता है। स्कूल बड़ी चालाकी से रिजल्ट के साथ ही चिह्नित दुकानों का नाम बताया जाता है और बुक लिस्ट थमा दिया जाता है। पुस्तकें उसी दुकान में मिलेंगी, क्योंकि वह सिर्फ स्कूल को पता है कि कौन-कौन सी किताबें चलेंगी। किताब विक्रेता ने बताया कि रिजल्ट निकलने के कम से कम एक महीना पहले पुस्तकों की सूची उपलब्ध होने से वे दिल्ली व अन्य राज्यों से किताब मंगाकर भारी छूट के साथ बोकारो के छात्रों को उपलब्ध करा सकेंगे। मगर स्कूल अपने निजी स्वार्थ के तहत चिह्नित दुकानों से पैसा कमाने के लालच में पुस्तकों की सूची जान-बूझकर साजिश के तहत सार्वजनिक नहीं करते है। ताकि कोई और पुस्तक विक्रेता शहर में ससमय पुस्तक नहीं मंगवा सके। रिजल्ट के साथ ही अभिभावकों को बताया जाता है दुकान का नाम


