CM बोले-10 साल से खुद के लिए कपड़े नहीं खरीदा:विमेंस डे पर महिला पत्रकारों ने बातचीत; कहा-पिता को खोने के बाद मां ने संभाला

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से महिला पत्रकारों ने बातचीत की। इस अनौपचारिक चर्चा में उन्होंने अपने जीवन में मातृशक्ति के योगदान, पत्नी के सहयोग, परिवार की भूमिका और महिलाओं के सशक्तिकरण पर खुलकर बातें कीं। बातचीत के दौरान उन्होंने एक दिलचस्प बात भी बताई। पिछले 10 साल से उन्होंने अपने लिए खुद कपड़े नहीं खरीदे। अब ज्यादातर कपड़े उनकी पत्नी खरीदती हैं या कार्यकर्ता भेंट कर देते हैं। दैनिक भास्कर की पत्रकार रजनी ठाकुर ने मुख्यमंत्री विष्षुदेव साय से निजी जीवन से जुड़े कई सवाल पूछे। इनमें घर के फैसले, कपड़ों का चुनाव और ‘सीएम मैडम’ की नाराजगी जैसे सवाल शामिल रहे। सवाल- आपके जीवन की प्रेरणा कौन सी महिलाएं रही हैं ? जवाब- सीएम साय ने बताया कि जब वे 10 साल के थे, उसी समय पिता का निधन हो गया था। परिवार में चार भाई थे और वे सबसे बड़े थे। उस समय छोटा भाई सिर्फ चार महीने का था। पिता के जाने के बाद मां ने ही पूरे परिवार को संभाला। मां ने ही मां और पिता दोनों का स्नेह दिया। परिवार की जिम्मेदारी उठाई और बच्चों को संभाला। उन्होंने कहा कि 10 साल की उम्र से ही घर की जिम्मेदारी समझने लगा था। आज जिस मुकाम पर हूं, उसमें माताजी के त्याग और तपस्या का बहुत बड़ा योगदान है। सवाल- आपकी पत्नी आपके जीवन में क्या बदलाव लेकर आईं ? जवाब- सीएम साय ने बताया कि 26 साल की उम्र में विधायक बनने की जिम्मेदारी मिल गई थी। उस समय शादी नहीं हुई थी। करीब एक साल बाद विवाह हुआ। राजनीति की व्यस्तता के कारण परिवार को समय देना आसान नहीं होता। ऐसे समय में धर्मपत्नी ने पूरा साथ दिया। घर-परिवार की जिम्मेदारी संभाली और बच्चों की परवरिश की। राजनीति में आगे बढ़ने में उनका बड़ा योगदान रहा। सवाल- प्रदेश के फैसले तो आप लेते हैं, लेकिन घर में किसकी चलती है ? जवाब- सीएम साय ने कहा कि घर में कोई भी बड़ा फैसला हम सब मिलकर ही लेते हैं। जैसे देश और प्रदेश में सामूहिक निर्णय होते हैं, वैसे ही हमारे घर में भी होता है। मां हैं, पत्नी हैं, सभी की राय ली जाती है। मेरे घर की महिलाएं हमेशा मुझे प्रोत्साहित करती हैं। इस मामले में मैं खुद को बहुत खुशनसीब मानता हूं कि कभी उनकी तरफ से कोई अड़चन नहीं आई। सवाल- खास मौकों पर ‘सीएम मैडम’ की क्या भूमिका होती है? कपड़ों का चुनाव क्या वही करती हैं ? जवाब- सीएम ने कहा कि एक समय ऐसा था जब घर में सबके कपड़े मैं ही खरीदता था। लेकिन पिछले दस सालों में व्यस्तता इतनी बढ़ गई कि खुद के लिए भी कपड़े खरीदने का समय नहीं मिलता। अब ज्यादातर कपड़े पत्नी ही खरीदती हैं। कई बार हमारे कार्यकर्ता भी प्यार से कपड़े भेंट कर देते हैं। बस उसी तरह काम चल रहा है। सवाल- क्या कभी उनकी नाराजगी का सामना करना पड़ा ? जवाब- मुख्यमंत्री ने कहा कि थोड़ा बहुत तो हर घर में होता है। वे कभी-कभी थोड़ी देर के लिए रूठ जाती हैं, लेकिन मान भी जाती हैं। सच कहूं तो उनका रूठना अच्छा भी लगता है। जब रूठती हैं तो मनाना भी पड़ता है। सवाल- क्या कभी उन्होंने राजनीति में आने की इच्छा जताई ? जवाब- सीएम ने कहा कि नहीं, आज तक उन्होंने ऐसी कोई इच्छा जाहिर नहीं की है। सवाल- आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। क्या फिर भी महिला सशक्तिकरण की जरूरत है ? जवाब- मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। पहले के समय में महिलाएं घरों से बहुत कम बाहर निकलती थीं और ज्यादातर गृहिणी की भूमिका निभाती थीं। हमारी सरकार बनने के बाद महिला स्व-सहायता समूहों का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया गया। आज स्थिति बदल रही है। किसी भी कार्यक्रम में जाएं तो सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की ही दिखाई देती है। प्रधानमंत्री और हमारी सरकार की पहल से महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। गांवों में छोटी-छोटी आय भी परिवार के लिए बहुत मायने रखती है। आज कार्यक्रमों में महिलाएं आत्मविश्वास के साथ नजर आती हैं। सवाल- बस्तर में नक्सलवाद खत्म होने के बाद वहां की महिलाओं के लिए क्या खास योजनाएं होंगी ? जवाब- सीएम ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। अब हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी वहां तेजी से विकास पहुंचाने की है। सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं। हमारी बेटियों का पुनर्वास भी कराया जा रहा है। महिलाओं के साथ हमारी सरकार मजबूती से खड़ी है। चार दशकों से जो विकास पिछड़ा हुआ है, उसे आगे बढ़ाया जाएगा। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े काम होंगे। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू करने की योजना है और लोगों को रोजगार से भी जोड़ा जाएगा। इंद्रावती नदी पर दो सिंचाई योजनाएं शुरू की जाएंगी। हर परिवार को दो-दो गाय देने की योजना है। वनोपज को भी अच्छी कीमत पर खरीदा जा रहा है। आज छत्तीसगढ़ में करीब 8 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और हमारा लक्ष्य इसे 10 लाख तक पहुंचाने का है।

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